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बल्लारशा-गोंदिया रेलवे लाइन जानवरों के लिए खतरनाक

– सिफारिशें हुईं दरकिनार, विभागों पर उठे सवाल

नागपुर :- केंद्रीय पर्यावरण और रेलवे विभागों द्वारा वन्यजीव दुर्घटनाओं को रोकने के लिए की गई कुछ सिफारिशों की अनदेखी के कारण बल्लारशा-गोंदिया रेलवे लाइन भारत में जंगली जानवरों के लिए सबसे खतरनाक होती जा रही है। यह बात तब उजागर हुई जब रविवार को ब्रह्मपुरी वन क्षेत्र के सिंदेवाही में इस लाइन पर ‘बिट्टू’ नामक एक बाघ की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। 19 जनवरी, 2025 को भी इसी लाइन पर एक बाघ की मौत हुई थी। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित बल्लारशा-गोंदिया रेलवे लाइन अब देश की सबसे खतरनाक रेलवे लाइनों में से एक मानी जा रही है — खासकर जंगली जानवरों के लिए। इस लाइन से होकर गुजरते घने जंगल और वन्यजीवों से भरे इलाक़े होने के कारण यहां बार-बार बाघ, तेंदुए, और हिरण जैसी प्रजातियाँ ट्रेन की चपेट में आ रही हैं।

रविवार को ब्रह्मपुरी वन क्षेत्र के सिंदेवाही के पास ‘बिट्टू’ नाम का एक युवा बाघ ट्रेन की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। यह घटना स्थानीय वन अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए गहरा झटका साबित हुई। इससे पहले 19 जनवरी 2025 को भी इसी रेलवे लाइन पर एक अन्य बाघ की मौत हुई थी, जिससे यह साफ है कि स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। वन्यजीव दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और रेलवे विभाग ने कई सिफारिशें की थीं. जैसे कि वन्यजीव गलियारों में स्पीड लिमिट, सुरक्षा बाड़ लगाना, और ट्रेन ड्राइवरों के लिए चेतावनी संकेतक लगाना। लेकिन इन सिफारिशों का पालन ज़मीनी स्तर पर नहीं किया गया। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि विभागों की लापरवाही ही इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है। वन विभाग ने अब रेलवे प्रशासन से एक संयुक्त कार्ययोजना बनाने की मांग की है। प्रस्ताव है कि बाघों के आवागमन वाले हिस्सों में सेंसिंग डिवाइस, स्पीड मॉनिटरिंग कैमरे, और ट्रैक के नीचे अंडरपास बनाए जाएं ताकि जानवर सुरक्षित रूप से पार कर सकें। अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बल्लारशा-गोंदिया लाइन “टाइगर डेथ ज़ोन” के नाम से बदनाम हो सकती है।

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