नागपुर :- वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार में भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा जारी नवीनतम ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्स असेसमेंट रिपोर्ट में भारत को वन क्षेत्र के मामले में 10वें से उछलकर 9वां स्थान प्राप्त हुआ है। यह रैंकिंग भारत के बढ़ते हरित आवरण और पर्यावरणीय नीतियों की सफलता का प्रतीक मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि दर में अपना तीसरा स्थान बनाए रखा है। यह दर्शाता है कि देश में हर साल वनों का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए गए हैं, जिनका सकारात्मक असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है।
भारत ने न केवल वन क्षेत्रफल में वृद्धि की है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, वन प्रबंधन और समुदाय आधारित वन संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। देश के कई राज्यों — विशेषकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तराखंड — में हरित क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। विश्व स्तर पर वन क्षेत्र में ब्राजील, कनाडा, रूस और अमेरिका शीर्ष स्थान पर हैं, जबकि भारत अब नौवें स्थान पर पहुंच गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक शीर्ष पाँच देशों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार की “राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना”, “ग्रीन इंडिया मिशन”, “राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम” और राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियानों ने इस सुधार में बड़ी भूमिका निभाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सहभागिता और पर्यावरण शिक्षा के प्रसार से भी वनों की रक्षा में मदद मिली है। पर्यावरणविदों के अनुसार, भारत को अब शहरी हरित क्षेत्र और वन आग प्रबंधन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही, औद्योगिक क्षेत्रों में हरित पट्टी बढ़ाना और आदिवासी समुदायों को वन संरक्षण से जोड़ना भविष्य में भारत की स्थिति को और मज़बूत कर सकता है। नागपूर








