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विदर्भ शीतकालीन सत्र बना ‘चुनावी जुमला’, विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

– कर्ज माफी, लाड़ली बहन और युवाओं पर चुप्पी—सीएम के भाषण से नाराज़ विपक्ष

– धान–सोयाबीन बोनस से लेकर संतरा मार्केट तक, विदर्भ फिर रहा उपेक्षित : वडेट्टीवार

नागपुर :- नागपुर में सात दिन का शीतकालीन सत्र रविवार को खत्म हो गया, लेकिन विपक्ष ने सात दिन के सत्र मेंं विदर्भ के लिए कुछ भी हासिल न कर पाने पर सरकार की कड़ी आलोचना की है. कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और ठाकरे गुट के नेता भास्कर जाधव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, यह सत्र केवल एक ‘चुनावी जुमला’ है और सरकार ने विदर्भ के लोगों को केवल घोषणाएं दी हैं. उन्होंने आखिरी हफ्ते के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री के भाषण पर भी कड़ी नाराजगी जताई. सत्र समाप्त खत्म होने के बाद, महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने एक संवाददाात सम्मेलन में ठाकरे गुट के नेता भास्कर जाधव, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और सतेज पाटिल, राकांपा शरदचंद्र पवार पार्टी केनेता जयंत पाटिल और प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे उपस्थित थे. इसमें महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने सत्र पर अपनी नाराजगी जताई और सरकार पर कड़ा हमला बोला. सत्रावसान के बाद पत्रकारों से बात करते हुए भास्कर जाधव ने किसानों की कर्ज माफी पर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा, भारी बारिश की वजह से सूखा घोषित करने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया. कल या परसों तक सरकार कह रही थी कि सरकार 3० जून को कर्ज माफ कर देगी. लेकिन, आज मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि वह 1 जुलाई को क्राइटेरिया और नीति घोषित करेगी. इसका मतलब है कि फिलहाल कर्ज माफी का कोई संकेत नहीं है.

लाढ़ली बहनों को 21०० रुपये देने का नाम तक नहीं लिया गया. मुख्यमंत्री ने युवा वर्क ट्रेनी के मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा. वहीं, कई ऐसे मुद्दे हैं जिनके बारे में सरकार ने एक शब्द भी नहीं कहा. इसलिए, आज का सत्र विदर्भ के लोगों को धोखा देने, उनकी भावनाओं से खेलने और विदर्भ के लोगों को हल्के में लेने के मतलब से किया गया. भास्कर जाधव ने आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष पार्टी होने के नाते हमने पूरी ताकत से सहयोग किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ. कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इस सत्र को असफल बताया. उन्होंने कहा, अगर आप मुख्यमंत्री के भाषण के डेटा देखें, तो यह भारत के बजट जैसा लगा, लेकिन असल में कुछ हासिल नहीं हुआ. हमने धान किसानों के लिए 2० हजार000 रुपये का बोनस और सोयाबीन के लिए प्रति क्विंटल सब्सिडी की मांग की थी, लेकिन इसका कहीं जिक्र नहीं है. संतरे और अंगूर के लिए कोई मार्केट नहीं है, सरकार बांग्लादेश की एक्सपोर्ट ड्यूटी पर भी चुप है. इसलिए, यह सत्र पूरी तरह से बेकार रहा है. विजय वडेट्टीवार ने सीधे सरकार को चैलेंज किया. उन्होंने बताया, हमने उनसे विदर्भ में एक सिंचाई प्रकल्प का नाम बताने को कहा था जिसे महायुति सरकार ने 2०14 से 2०25 के बीच शुरू किया और पूरा किया. हालांकि, मुख्यमंत्री के पास इसका कोई जवाब नहीं था. हालांकि विदर्भ जंगल और संसाधनों से भरपूर है, फिर भी यहां की समस्याएं हल नहीं हुई हैं. हमने धान उगाने वाले किसानों के लिए 2० हजार रुपये का बोनस मांगा था वह नहीं मिला. उन्होंने सोयाबीन उगाने वाले किसानों के लिए प्रति क्विंटल बोनस मांगा. उसका भी कहीं जिक्र नहीं किया गया. दिलचस्प बात यह है कि विदर्भ में संतरे और अंगूर का कोई मार्केट नहीं है. सरकार ने इस बारे में भी कुछ नहीं कहा है. मार्केट की गारंटी और बांग्लादेश जाने वाले हमारे संतरों पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी का मतलब है कि हमारे संतरों को मार्केट नहीं मिलता. लेकिन सरकार ने इनमें से किसी भी मुद्दे पर कोई कमेंट नहीं किया है. विदर्भ में शिक्षा को लेकर बड़े मुद्दे हैं. कपास उगाने वालों के लिए बड़े मुद्दे हैं.

सात दिन का सत्र पूरी तरह बेकार: महाविकास आघाड़ी

वडेट्टीवार ने राज्य में बढ़ते ड्रग्स के मामलों पर चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया, विदर्भ समेत महाराष्ट्र इस समय ड्रग्स की गिरफ्त में है. इन ड्रग्स से पूरी युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है. लेकिन इसका कोई पक्का हल नहीं है. कुपोषण से 46 हजार बच्चे मर गए, लेकिन इसका भी कोई पक्का हल नहीं है. विजय वडेट्टीवार ने कहा, इस साल के सत्र को चुनावी जुमला कहा जा सकता है.मुंबई की आई-कैचिंग ज्यादा से ज्यादा मुद्दों पर थी. इसमें बहुत ज्यादा समय लगा. कुपोषण की समस्या बड़ी है. 46 हजार नए जन्मे बच्चों की मौत हो गई, इसका कोई हल नहीं है. भ्रष्टाचार पर सरकार कुछ नही बोली. विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस सत्र को खत्म करने की जल्दी की.

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