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बच्चों पर हमलों के बाद सख्ती

– सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नागपुर में आवारा कुत्तों के शेल्टर होम की तैयारी

– स्कूल, अस्पताल और स्टेशन होंगे डॉग-फ्री : नगर निगम को आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के निर्देश

नागपुर :- बच्चों पर कुत्तों के हमलों की घटनाओं के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को सभी रा’यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा कुत्तों पर नियंत्रण रखने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद, रा’य सरकार ने नगर निगम को शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस और रेलवे स्टेशनों पर आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम स्थापित करने का निर्देश दिया है. इसके बाद, नगर निगम कुत्तों के लिए आश्रय स्थल खोजने और वहां व्यवस्था स्थापित करने में तेजी से जुट गया है.

अब तक शहर में दो स्थानों की पहचान की जा चुकी है और अन्य स्थानों की पहचान जारी है. इस बीच, नगर निगम का पशु चिकित्सा विभाग शहर में पर्याप्त जगह की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को ब’चों पर हुए हमले के मद्देनजर, सभी रा’यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही, इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. इसलिए, सभी व्यवस्थाएं युद्धस्तर पर काम करना शुरू कर चुकी हैं. इस संबंध में, रा’य सरकार के मनपा निदेशालय ने 18 अगस्त को रा’य के नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों को एक परिपत्र जारी किया है, जिसमें उन्हें संबंधित स्थानों से आवारा कुत्तों को पकडऩे, उनका टीकाकरण करने, उन्हें कृमिनाशक दवा देने और आश्रयों में रखने का निर्देश दिया गया है. परिपत्र में कहा गया है कि इस आदेश के दो सप्ताह के भीतर आवारा कुत्तों की सूची तैयार की जानी चाहिए. संबंधित स्थानों के संस्थानों के प्रमुखों को परिसर में पर्याप्त बाड़, चारदीवारी और फाटक जैसी व्यवस्थाएं करनी चाहिए ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके. इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है.

पशु जन्म नियंत्रण नियम 223 के अनुसार, कुत्तों को नसबंदी करा दी जानी चाहिए और टीकाकरण के बाद उन्हें उनके मूल स्थान पर वापस छोड़ दिया जाना चाहिए. पहले ऐसा होता था. लेकिन नए आदेश में कहा गया है कि उन्हें शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाना चाहिए. इसलिए अब नगर निगम को शेल्टर होम तैयार करने होंगे. इतना ही नहीं, नगर निगम को ही उन्हें पकडऩे, शेल्टर होम में भोजन उपलब्ध कराने और उनकी देखभाल करने का काम भी करना होगा.


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