– अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की तैयारी में भारत
अहमदाबाद :- इसरो के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने बुधवार को कहा कि भारत की योजना 2040 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की है. अंतरिक्ष गतिविधियों में कई मिशन चलाए जाने वाले हैं. 2040 तक हमारी योजना भारतीयों को चंद्रमा पर भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की है. इसके अलावा एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है इसरो के पूर्व प्रमुख ने देश के अंतरिक्ष अन्वेषण के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में चंद्रयान से संबंधित एक मिशन होगा और जापान के साथ लैंडर और रोवर पर काम चल रहा है. हमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में कुछ विशिष्ट जानकारी खोजने का प्रयास करना चाहिए. यह तो आगे की गतिविधियों की बस, शुरुआत होगी. शैक्षणिक संस्थानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और निजी कंपनियों के लिए भी भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण में योगदान देने के कई अवसर खुलेंगे. कुमार ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का निर्माण मुख्य रूप से सामाजिक लाभ के लिए शुरू किया, न कि सैन्य उद्देश्यों के लिए. जब भारत को आजादी मिले मात्र 10 वर्ष ही हुए थे, तब अंतरिक्ष क्षेत्र में डॉ. विक्रम साराभाई ने अभूतपूर्व योगदान दिया. साराभाई ने इस बात का पता लगाया कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी किस प्रकार प्रसारण संचार और मौसम निगरानी में सुधार कर नागरिकों को सुविधाएं प्रदान कर सकती है.
इसरो के नये साल का पहला प्रक्षेपण 12 को
इसरो 12 जनवरी को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी 62 मिशन का प्रक्षेपण करेगा. इसरो नये साल के अपने पहले मिशन की तैयारी में जुट गया है. इसरो के एक अधिकारी के अनुसार, इस मिशन का मुख्य पेलोड ‘ईओएस-एन1’ है, जो रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा रणनीतिक उद्देश्यों के लिए निर्मित एक इमेजिंग उपग्रह है. इसरो ने कहा, ‘पीएसएलवी-सी 62 मिशन का प्रक्षेपण 12 जनवरी 2026 को भारतीय समयानुसार 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्थित एसडीएससी एसएचएआर के प्रथम प्रक्षेपण पैड (एफएलपी) से निर्धारित है. ‘रॉकेट में स्पेन के एक ‘स्टार्टअप’ द्वारा विकसित ‘केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर’ (केआईडी) भी होगा.



