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फुटपाथों पर अतिक्रमण से हाईकोर्ट सख्त, मनपा अधिकारियों को देखने के निर्देश

– दिव्यांग सुविधाओं पर सवाल: शहर का कोई भी बस स्टॉप पूरी तरह अनुकूल नहीं

– ई-बस सेवा और सार्वजनिक सुविधाओं की मांग पर जनहित याचिका का दायरा बढ़ा

नागपुर :- शहर के अधिकांश फुटपाथों पर हुए अतिक्रमण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए मनपा अधिकारियों से कहा कि वे स्वयं खामला क्षेत्र में जाकर फुटपाथों की वास्तविक स्थिति देखें। वहां फुटपाथों पर दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण किया गया है, जिससे पैदल चलने वालों को कठिनाई हो रही है। मनपा चुनाव से पहले ही दिव्यांगों के लिए विशेष ई-बस सेवा शुरू करने और चुनावों के दौरान शहर में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं की उपलब्ध कराने की मांग करते हुए प्रकाश अंधारे द्वारा यह जनहित याचिका दायर की गई थी। मामले पर मंगलवार को व्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील एड. सेजल लाखानी ने कहा कि शहर में दिव्यांग अधिकार कानून का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। शहर का कोई भी फुटपाथ या बस स्टॉप दिव्यांगों के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे को याचिका में शामिल कर दायरा बढ़ाने की अनुमति मांगी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। आवश्यक संशोधन करने के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है। मनपा की ओर से एड. जेमिनी कासट ने पक्ष रखा।सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए नगर निगम अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि वे स्वयं खामला क्षेत्र में जाकर स्थिति का जायजा लें।

अदालत ने कहा कि शहर के अधिकांश इलाकों में फुटपाथ नाममात्र के रह गए हैं। पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए मार्गों पर दुकानों, ठेलों और अस्थायी निर्माणों का कब्जा है, जिससे नागरिकों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ रहा है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता है तो अदालत को सख्त आदेश जारी करने पड़ सकते हैं। न्यायालय ने यह भी पूछा कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई और भविष्य की क्या योजना है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। विशेष रूप से खामला क्षेत्र में फुटपाथ पूरी तरह बाधित हैं और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि वह विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे और बताए कि शहरभर में अतिक्रमण हटाने के लिए किस प्रकार की कार्रवाई प्रस्तावित है। अगली सुनवाई में इस मामले की प्रगति पर न्यायालय नजर रखेगा। शहर में लगातार बढ़ते अतिक्रमण को लेकर अब नागरिकों की उम्मीदें न्यायालय के हस्तक्षेप पर टिकी हैं।

बस स्टॉप व फुटपाथों की सूची मांगी

अदालत ने मनपा को निर्देश दिया कि शहर में कितने बस स्टॉप और फुटपाथ पर दिव्यांगों के लिए ई-बस सेवा संबंधित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसकी विस्तृत सूची प्रस्तुत की जाए। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। साथ ही अदालत ने एड. अनिश कठाणे की एक सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को निर्देश दिया गया है कि मनपा द्वारा सूची प्रस्तुत किए जाने के बाद संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में पेश करे।

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