– हिंगना-महालगी नगर तक गूंज, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज
नागपुर :- नागपुर शहर के विभिन्न दुय्यम निबंधन कार्यालय इन दिनों NA-48 अंतर्गत रजिस्ट्रियों को लेकर चर्चाओं में हैं। टाउन प्लानिंग (TP) स्वीकृति के अभाव में अनेक लेआउट की कई रजिस्ट्रियां रोके जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अब तक बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित रखे गए हैं, हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, 500 से अधिक प्लॉट की रजिस्ट्रियां हिंगना, महालगी नगर सहित अन्य दुय्यम निबंधन कार्यालयों में कराए जाने की चर्चा है। यह भी कहा जा रहा है कि NA-48 का हवाला देकर विभिन्न कार्यालयों में रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। इन दावों की अब तक स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप और चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं कि रजिस्ट्रियां रोके जाने के बाद उत्पन्न स्थिति का लाभ उठाते हुए कुछ कथित दलाल “जुगाड़” के माध्यम से कार्य कराने में सक्रिय हैं। आरोप यह भी हैं कि कुछ मामलों में 70 हजार से 1 लाख रुपये तक की मांग की जा रही है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस आधिकारिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं पर अंकुश लगने के लिए इसकी उच्च स्तरीय जांच होना आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व प्रतापनगर स्थित दुय्यम निबंधन कार्यालय में राज्य के राजस्व मंत्री द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया था। उस दौरान अनियमितताओं की बात सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी पर जांच और कार्रवाई की गई थी।
नागरिकों में असंतोष, पारदर्शिता की मांग
नागपुर शहर में वर्तमान दुय्यम निबंधकों के कार्यकाल को लेकर भी कुछ नागरिकों के बीच असंतोष की चर्चा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि लंबित रजिस्ट्रियों को कथित आर्थिक लेन-देन के आधार पर प्राथमिकता दी जा रही है, हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अगर ये सच है तो इसकी उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बना रहे। नागरिकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि शासन-प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है।