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गोरेगांव तहसील में आवास योजना की रेती रॉयल्टी में अनियमितता, लाभार्थियों ने लगाए धोखाधड़ी के आरोप

– लाभार्थियों के रॉयल्टी का इस्तेमाल किए जाने के मामले उजागर

यासीन शेख, गोरेगाव :- गोरेगांव तहसील में आवास योजना के तहत लाभार्थियों को दी जाने वाली रेती की रॉयल्टी को लेकर गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया है कि उनके नाम पर रॉयल्टी जारी कर रेत उठाई गई, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई और ना ही उन्हें रेत प्राप्त हुई है गोरेगांव तहसील से रॉयल्टी चोरी होने के अनेक मामले उजागर हो रहे हैं आवास लाभार्थी तहसील के चक्कर मार रहे हैं परंतु उन्हें रॉयल्टी नहीं दी जा रही है जो समझ के परे हैं।

जानकारी के अनुसार प्रशासन द्वारा आवास योजना के प्रत्येक पात्र लाभार्थी को 5 ब्रास रेत निःशुल्क प्रदान की जाती है इसके लिए रॉयल्टी पर्ची तहसील कार्यालय से जारी की जाती है किंतु गोरेगांव तहसील कार्यालय में रॉयल्टी को लेकर शुरुआत से ही अनियमितता रही है स्थित कर्मचारी लाभार्थियों द्वारा लाभार्थियों को रॉयल्टी देने में टालमटोल की जाता है उल्लेखनीय यह है कि तहसील के रॉयल्टी रिकॉर्ड से लाभार्थियों की रॉयल्टी ही गायब बताई जा रही है यहां ग्राम घोटी में आने वाले गहेलाटोला के लाभार्थी नरेंद्र तिलकचंद सोनवणे और चंपा रामचंद्र बिजेवार इन दोनों लाभार्थियों के नाम पर तहसील रिकॉर्ड में पांच ब्रास रेती उठाए जाने की एंट्री तहसील में दर्ज है परन्तु दोनों लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें न तो रॉयल्टी पर्ची मिली और न ही रेत प्राप्त हुई।

लाभार्थियों का आरोप है कि उनके नाम का दुरुपयोग कर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रेत उठाई गई है आवास योजना में रॉयल्टी को लेकर ऐसे अनेक मामले धीरे-धीरे उजागर हो रहे हैं जिसमें संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल के घेरे में हैं संबंधित कर्मचारियों का कहना है कि रिकॉर्ड के अनुसार लाभार्थियों के नाम पर रेत उठाई जा चुकी है। वहीं लाभार्थियों का आरोप है कि रॉयल्टी प्रक्रिया में धांधली कर उनके अधिकारों का हनन किया गया है क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि आवास योजना की रॉयल्टी का दुरुपयोग कथित रेत माफिया द्वारा किया जाने की चर्चाएं है लाभार्थियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

लाभार्थियों द्वारा जांच की मांग

पीड़ित लाभार्थी नरेंद्र तिलक चंद सोनवाने का कहना है कि यह सीधे तौर पर उनके हक की चोरी है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और वास्तविक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है यदि समय रहते मामले की पारदर्शी जांच नहीं की गई, तो लाभार्थियों द्वारा आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है.

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