– नियमों की धज्जियां, वन विभाग की अनदेखी!*
यासीन शेख, गोंदिया देवरी :- तालुका क्षेत्र में इन दिनों तेंदूपत्ता कटाई का मौसम पूरे जोर पर है, लेकिन इस काम के नाम पर बाल मजदूरों से काम करवाए जाने की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। हर साल इस मौसम में ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता है, लेकिन इस बार ठेकेदारों ने अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए स्थानीय वयस्क मजदूरों को नजरअंदाज कर नाबालिग बच्चों को काम पर लगा दिया है। खास बात यह है कि जिन वन विभाग क्षेत्रों में यह अवैध काम चल रहा है, वहां के अधिकारी और कर्मचारी इस गंभीर मामले से पूरी तरह अनजान बने हुए दिखाई दे रहे हैं।
देवरी वनपरिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अधिकांश गांवों में इस समय तेंदूपत्ता संग्रह से पहले पेड़ों की छंटाई का काम युद्धस्तर पर जारी है। पेड़ों में नई कोपलें आने और पत्तों का उत्पादन अधिक होने के लिए लगभग डेढ़ से दो महीने पहले यह कटाई की जाती है। लेकिन इस काम में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। ठेकेदार इन बच्चों को बेहद कम मजदूरी देकर पूरे दिन काम करवा रहे हैं।
वर्तमान में स्कूल सुबह के सत्र में चल रहे हैं, जिसका फायदा उठाकर दोपहर में घर पर रहने वाले बच्चों को थोड़े पैसों का लालच देकर जंगल में ले जाया जा रहा है। खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र में ये बच्चे तपती धूप में मेहनत कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।
बाल मजदूरों से काम करवाना कानूनन एक गंभीर अपराध है, फिर भी देवरी तालुका के कई जंगल क्षेत्रों में खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है। स्थानीय मजदूरों को देनी पड़ने वाली मजदूरी बचाने के लिए ठेकेदार बच्चों का उपयोग कर उनका शोषण कर रहे हैं। इस पूरे मामले की ओर वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर अनदेखी किए जाने का आरोप भी नागरिकों द्वारा लगाया जा रहा है।
कड़ी धूप में बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाले इन ठेकेदारों और इस पर आंखें मूंदे बैठे संबंधित कर्मचारियों पर प्रशासन क्या सख्त कार्रवाई करेगा? यह सवाल अब उठने लगा है। वरिष्ठ वन अधिकारियों से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग जोर पकड़ रही है।