– RTO के ‘पंचरत्न’ वसूली मॅन
चंद्रपूर :- महाराष्ट्र के क्षेत्रीय परिवहन विभाग में इन दिनों एक ऐसा ‘महा-स्कैम’ आकार ले चुका है, जिसकी गूंज मंत्रालय के गलियारों से लेकर आम जनता के बीच ‘तौबा-तौबा’ मचा रही है। यह महज पैसों का लेन-देन नहीं है, बल्कि एक ऐसा सुसंगठित सिंडिकेट है जिसमें निलंबित अधिकारी, सेवा-बाहर दलाल और कुछ भ्रष्ट जांच एजेंसियां एक सुर में काम कर रही हैं?
‘सुपर सीएम’ खरमाटे: सेवा में नहीं, फिर भी चलते हैं ऑर्डर
इस पूरे खेल का सबसे हैरतअंगेज किरदार है खरमाटे। बताया जा रहा है कि यह शख्स आधिकारिक तौर पर आरटीओ सेवा में नहीं है, लेकिन इसके बावजूद पूरे विभाग में इसके ‘वसूली अभियान’ के लिखित और मौखिक ऑर्डर चलते हैं। खरमाटे वह ‘अदृश्य हाथ’ है जो तय करता है कि किस चेकपोस्ट पर कौन बैठेगा और महीने का ‘टारगेट’ कितना होगा। अगर कोई अधिकारी इसकी बात टालने की जुर्रत करता है, तो उसके खिलाफ शिकायतों की ऐसी बौछार शुरू कर दी जाती है कि उसका जीना मुहाल हो जाए।
वसूली के ‘पोस्टर बॉय’: भुयार, नागरे और खैरनार की तिकड़ी!
महाराष्ट्र परिवहन विभाग में इन दिनों तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं— RTO भुयार, और दो निलंबित अधिकारी राजू नागरे तथा खैरनार। नियम के मुताबिक, निलंबित अधिकारी को विभाग की गतिविधियों से दूर रहना चाहिए, लेकिन यहां गंगा उल्टी बह रही है। इन तीनों के नामों पर पूरे महाराष्ट्र में ‘वसूली के स्टार’ चमक रहे हैं। सूत्रों की मानें तो चेकपोस्ट से लेकर शहर के भीतर तक, इन अधिकारियों का समानांतर प्रशासन चलता है। इनका खौफ इतना है कि ईमानदार आरटीओ इंस्पेक्टर इनके नाम से थर-थर कांपते हैं।
नागपुर का ‘गुर्गा’ योगेश: 8000 ट्रकों की ‘ओवरलोड’ दास्तान
नागपुर, जो परिवहन का केंद्र है, वहां खरमाटे ने अपना सबसे खास सिपहसालार तैनात किया है— योगेश। योगेश कोई अधिकारी नहीं, बल्कि एक प्राइवेट गुर्गा है, जिसका काम है ‘ओवरलोड एंट्री’ वसूलना।
खबर है कि नागपुर के रास्ते गुजरने वाले लगभग 8000 ट्रकों की अवैध एंट्री का जिम्मा योगेश के पास है।
वसूली का रेट: हर ट्रक से हजारों रुपये की ‘मंथली’ वसूली जाती है।
: यह गणित महीने के अंत तक करोड़ों के आंकड़े को पार कर जाता है, जो सीधे ऊपर बैठे आकाओं की तिजोरी में पहुंचता है।
जब ACB बन गई वसूली गैंग का ‘हथियार’! म्याऊ म्याऊ दुध पिणे वाली बिल्ली कौन?
इस पूरे स्कैम का सबसे काला अध्याय वह है, जहां भ्रष्टाचार मिटाने वाली एजेंसी Anti-Corruption Bureau (ACB) के कुछ अधिकारियों पर ही सवालिया निशान लग गए हैं। आरोप है कि नागपुर का एक ‘बड़ा अधिकारी’ इस पूरे रैकैट को संरक्षण दे रहा है। और काले कारनामो से बडी रुपयोकी नागपूर मे बैठे डकार ले रहे है! और अवलिया जैसे काले कारनामो अंजाम दे रहे है! एक ही जगह बैठे इस अधिकारी ने ACB के पुरे टीम को बदनाम कर डाला है!
जब कोई ईमानदार अधिकारी इस वसूली सिंडिकेट के सामने झुकने से मना कर देता है, तो उसे रास्ते से हटाने के लिए ACB के ट्रैप का सहारा लिया जाता है। यह एक सोची-समझी साजिश है:
पहले अधिकारी को खरमाटे के ‘वसूली आदेश’ भेजे जाते हैं।
मना करने पर उसके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं।
अंत में, ACB के साथ मिलकर ‘फर्जी षडयंत्र’ रचा जाता है ताकि उस अधिकारी का करियर तबाह हो जाए।
चंद्रपुर और लक्कडकोट चेकपोस्ट का ‘फर्जी’ खेल
हाल ही में चंद्रपुर के लक्कडकोट चेकपोस्ट पर हुआ ACB ट्रैप इस वक्त सबसे बड़ा विवाद बन गया है। इंस्पेक्टर पवन पोटदुखे को जिस तरह से निशाना बनाया गया, उसने विभाग के भीतर के आक्रोश को ज्वालामुखी बना दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके इशारे पर पोटदुखे को टारगेट किया गया? क्या यह वही सजा है जो एक ईमानदार अधिकारी को सिस्टम से लड़ने पर दी जाती है?
विधायक विजय वड्डेटीवार का हल्लाबोल
इस महा-घोटाले की परतें तब खुलीं जब कद्दावर नेता और विधायक विजय वड्डेटीवार ने विधानसभा से लेकर मीडिया तक आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने सीधे तौर पर भुयार, खैरनार, खरमाटे, नागरे और योगेश का नाम लेते हुए ACB की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। वड्डेटीवार ने साफ कर दिया है कि विदर्भ में अब इन ‘वसूली चोरों’ का बंदोबस्त होकर रहेगा।
“सिस्टम में बैठे ये लोग दीमक की तरह विभाग को चाट रहे हैं। भुयार और खरमाटे जैसे लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। अब इनकी फाइलों का हिसाब होगा।” — विजय वड्डेटीवार
क्या टूटेगा यह रैकैट?
महाराष्ट्र आरटीओ की यह ‘चिट्ठी’ अब सार्वजनिक हो चुकी है। हर महीने करोड़ों रुपये डकारने वाली यह मंडली अब बेनकाब है। सवाल यह है कि क्या शासन इन ‘वसूली के सुल्तानों’ पर नकेल कसेगा या फिर पवन पोटदुखे जैसे और भी कई ईमानदार अधिकारी इस षडयंत्र की भेंट चढ़ते रहेंगे?
यह खबर उन तमाम भ्रष्टों के लिए एक चेतावनी है जो सरकारी कुर्सी को अपनी जागीर समझकर ‘वसूली का धंधा’ चला रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि जनता और शासन मिलकर इस ‘सिस्टम के कचरे’ को साफ करें।