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अंधाधुंध पेड़ कटाई से बढ़ी चिंता

– ‘झाड़ीपट्टी’ की हरित पहचान पर संकट

भंडारा :- पूर्व विदर्भ का ‘झाड़ीपट्टी’ क्षेत्र कहलाने वाला भंडारा जिला आज अपनी हरित पहचान खोने के कगार पर पहुंच गया है। विकास कार्यों के नाम पर हो रही लगातार वृक्ष कटाई से पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों में गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में 50 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों को ‘हेरिटेज ट्री’ का दर्जा देकर उनके संरक्षण को अनिवार्य किया था। इसके बावजूद भंडारा जिले में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग 53 के चौड़ीकरण के लिए 96 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है, जबकि इनमें से कितने पेड़ हेरिटेज श्रेणी में आते हैं, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

भंडारा नगर परिषद में आज तक हेरिटेज पेड़ों का सर्वेक्षण नहीं किया गया है। ऐसे में बिना पहचान किए पेड़ों की कटाई की अनुमति देना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

इस मामले में नगर परिषद के अधिकारियों से संपर्क करने पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया। पवनी नगर परिषद की स्थिति भी अलग नहीं है। यहां सर्वेक्षण होने का दावा किया गया, लेकिन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि नियम केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो रहा है।

भंडारा में पिछले कुछ वर्षों से पेड़ कटाई का सिलसिला लगातार जारी है। दिसंबर 2024 में एक वर्ष के भीतर 728 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा 2019, 2021 और अन्य वर्षों में भी बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कई पुराने और मूल्यवान वृक्ष शामिल थे।

पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि हेरिटेज पेड़ केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक

पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। इनके अंधाधुंध कटान से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि जिले में सभी पुराने पेड़ों का तत्काल सर्वेक्षण कर उन्हें हेरिटेज दर्जा दिया जाए। साथ ही, जब तक पूरी जांच नहीं होती, तब तक पेड़ कटाई पर रोक लगाई जाए। लगातार हो रही लापरवाही और नियंत्रणहीन वृक्ष कटाई के कारण भंडारा की ‘झाड़ीपट्टी’ वाली पहचान समाप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जिले की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

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