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RSS प्रमुख भागवत बोले- भारत पहले ही हिंदू राष्ट्र

– घोषित करने की जरूरत नहीं; कहा- अयोध्या में राम मंदिर जनसमर्थन से बना  

नई दिल्ली :- RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। इसे घोषित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता और देशभर के लोगों के समर्थन से हुआ।

भागवत सोमवार को महाराष्ट्र के नागपुर के रेशिमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम उन लोगों के सम्मान में था, जिनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में राम मंदिर का निर्माण हुआ।

उन्होंने कहा कि अगर इतना बड़ा रामजन्मभूमि आंदोलन नहीं होता और सत्ता में प्रतिबद्धता नहीं होती, तो मंदिर का निर्माण संभव नहीं था। देश ने एक रास्ता चुना और उसी का नतीजा आज सामने है।

भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहने पर पहले लोग मजाक उड़ाते थे। लेकिन अब वही लोग इसे हिंदुओं की भूमि कहने लगे हैं। उन्होंने कहा, सूरज पूर्व में उगता है, क्या इसे घोषित करने की जरूरत है? उसी तरह भारत हिंदू राष्ट्र है।

उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का तरीका है, जिन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान दिया। अब समाज की जिम्मेदारी है कि वह देश को और मजबूत और समृद्ध बनाए।

अंत में उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान भारत के लोगों के प्रयास से ही होगा। कोई दूसरा देश भारत को नहीं बचाएगा। उन्होंने कहा कि भारत महान बनेगा और दुनिया को दिशा देगा, यह तय है।

RSS के बयान के अनुसार भागवत ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भगवान राम की इच्छा से हुआ। उन्होंने इसकी तुलना भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने से की। उन्होंने कहा कि जैसे गोवर्धन उठाने में सबका योगदान जरूरी था, वैसे ही मंदिर निर्माण में भी हर व्यक्ति का योगदान रहा।

उन्होंने कहा, भगवान की उंगली पर पर्वत टिका रहता है, लेकिन वह उंगली तब तक नहीं उठती जब तक लोग अपनी लकड़ी नहीं लगाते। मंदिर भी उसी तरह बना है। उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति ने इसमें योगदान दिया।

1947 में आजादी पाई, लेकिन आत्मविश्वास नहीं था

सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए भारत का उत्थान जरूरी है। यह विचार 150 साल पहले योगी अरविंद ने रखा था। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे लोग योगदान देते हैं, यह संकल्प पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ता है। यह पुनरुत्थान की प्रक्रिया 1857 से शुरू हुई थी।

इसी संदर्भ में उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार के शपथ लेने पर लंदन के द गार्डियन अखबार ने लिखा था कि इस दिन भारत ने आखिरकार अंग्रेजों को अलविदा कह दिया।

भागवत ने कहा, “तकनीकी रूप से हमने 15 अगस्त 1947 को आजादी पाई, लेकिन तब पूरी तरह आत्मविश्वास नहीं था।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सत्ता में बैठे लोग प्रतिबद्ध नहीं होते, तो क्या राम मंदिर बन पाता।

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