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ड्यूटी के दौरान भयानक दुर्घटना, शालार्थ आईडी घोटाले का निर्दोष शिकार

– शिक्षक पैसों के लिए बना ‘डिलीवरी बॉय’

 नागपुर :-  शालार्थ आईडी घोटाले की छाया में फंसे 632 शिक्षकों का दर्द अब सामने आने लगा है. आज ये शिक्षक अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 14 महीनों से वेतन न मिलने के कारण परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ऑनलाइन भोजन वितरण ‘डिलीवरी बॉय’ का काम कर रहे एक शिक्षक की दुर्घटना ने पूरी व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

यवतमाल जिले के अनिल श्रीराम राठोड़ 2०13 से नागपुर के एक स्कूल में शिक्षक केरूप में कार्यरत थे. मार्च 2०25 से उनका वेतन रुक गया और परिवार का गुजारा ठप हो गया. भोजन वितरण करते समय हुई दुर्घटना के बाद अनिल राठोड़ अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. पत्नी, दो छोटे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के सहारे चल रहे ये शिक्षक दिन भर स्कूल में ड्यूटी करते थे और शाम को ऑनलाइन भोजन वितरण करते थे. लेकिन, यहां भी भाग्य ने अपना खेल खेला.

इस अन्याय के खिलाफ 472 शिक्षकों ने अदालत का रुख किया. 1०अक्टूबर, 2०25 के अंतरिम आदेश के अनुसार, सरकार ने सात महीने के वेतन का बकाया मांगा, लेकिन भुगतान नहीं किया. अंतत:, 22 अप्रैल, 2०26 को अदालत ने अंतिम आदेश जारी कर इन शिक्षकों के वेतन का तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया.

लेकिन इस आदेश केबाद भी सरकार की कार्रवाई धीमी रही है. डिलीवरी के दौरान उनका एक्सीडेंट हो गया. कंधे में मोच आने के कारण उनकी सर्जरी हुई और पिछले तीन दिनों से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. यह सिर्फ एक शिक्षक की दुर्दशा नहीं है, बल्कि ऐसे सैकड़ों शिक्षकों के परिवारों की दर्दनाक सच्चाई है. जिन 632 शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है, उनमें से लगभग आधे शिक्षक आज अंशकालिक रूप से काम कर रहे हैं. कुछ ओला-उबर चलाते हैं, कुछ स्विगी-जोमैटो में डिलीवरी करते हैं, जबकि कुछ पेट्रोल पंपों पर काम कर रहे हैं. इसके बावजूद, वे दिन के दौरान स्कूल में छात्रों को ज्ञान प्रदान करने की जिम्मेदारी उसी निष्ठा से निभा रहे हैं. इतना ही नहीं, वे जनगणना और एसआईआर के काम के लिए भी जिम्मेदार हैं. शिक्षकों का वेतन बिना किसी पूर्व सूचना के रोक दिया गया. आज स्थिति ऐसी है कि ज्ञान प्रदान करने वाला शिक्षक अपने परिवार का दो वक्त का पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहा है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षक भूख हड़ताल पर हैं. अदालत ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया है. इसलिए, सरकार को तत्काल वेतन का भुगतान करके हमें राहत प्रदान करनी चाहिए, ऐसा विदर्भ खाजगी प्राथमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष तन्मय जाधव ने कहा है.


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