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सुको के फैसले से मनपा एक्शन मोड में

– मनपा के टारगेट पर आवारा कुत्ते

नागपुर :- आवारा कुत्तों के कारण भले ही हर दिन काटने या झपटने से दुर्घटनाएं हो रही हों लेकिन इनके खिलाफ कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पा रही थी. बहरहाल अब सर्वोच्च न्यायालय के अहम फैसले के चलते आवारा कुत्ते मनपा के टारगेट पर होंगे. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मनपा एक्शन में गई है. पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है. कार्रवाई शुरू होने की जानकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गजेन्द्र महल्ले ने दी. उन्होंने कहा कि सुको के आदेश का अध्ययन हो रहा है. हालांकि आदेश के अनुसार वहीं जल्द एसओपी तैयार कर अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थल पर पाए जाने वाले खतरनाक आवारा कुत्ते निशाने पर होंगे जिसके बाद अगला चरण त्तय किया जाएगा. बताया जाता है कि सिटी में एक लाख से भी अधिक आवारा कुत्ते होने का अनुमान है.

वर्तमान वर्ष 2026 की शुरुआत बेहद चिंताजनक रही है. केवल जनवरी से अप्रैल तक के शुरुआती 4 महीनों में ही डॉग बाइट के 4,226 मामले सामने आ चुके हैं. इस वर्ष अब तक हर महीने 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं.

वर्तमान में भांडेवाड़ी डॉग शेल्टर की क्षमता मात्र 500 कुत्तों को रखने की है. ऐसे में हजारों की संख्या में पकड़े जाने वाले शात कुत्तों को रखने की बड़ी चुनौती मनपा के सामने है. इस पर डॉ. महल्ले ने स्पष्ट किया है कि शेल्टर की क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा. इसके

अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं और ‘डॉग लवर्स (कुत्ता प्रेमियों) की मदद लेकर एक विशेष ‘दत्तक योजना’ (गोद लेने की योजना। भी शुरू की जाएगी लेकिन किसी भी हाल में इन कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा.

मेयो-मेडिकल से शुरू होगा अभियान

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन करते हुए महानगरपालिका ‘एक्शन मोड’ में आ गई है. मनपा ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को पकड़ने का कड़ा निर्णय लिया है. डॉ. महल्ले के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई 3 अलग-अलग चरणों में की जाएगी जिसमें कुत्तों का उनके व्यवहार के आधार पर वर्गीकरण होगा. नागरिकों की शिकायत पर पागल और बेहद आक्रामक कुत्तों को पकड़ा जाएगा. जो कुत्ते मानव जीवन के लिए खतरा हैं या जिनमें रेबीज जैसे लक्षण हैं, नियमानुसार उन्हें मार दिया जाएगा. शांत और स्वस्थ कुत्तों को भांडेवाड़ी स्थित ‘डॉग शेल्टर’ में ले जाया जाएगा जहां उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया जाएगा.

शहर के 2 अति संवेदनशील इलाकों मेयो अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से कार्रवाई की शुरुआत होगी. इन परिसरों में रात के समय मरीजों के रिश्तेदारों और छोटे बच्चों पर कुत्तों के हमले की ढेरों शिकायतें मिल रही थीं.

‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ अभियान के तहत हर साल लगभग 15,000 कुत्तो की नसबंदी होती है लेकिन इसके बावजूद उनकी आबादी नियंत्रण में नहीं आ रही. इसी को देखते हुए मनपा ने सुप्रीम कोर्ट के ‘खतरनाक कुत्ते हटाएं’ निर्देश का कड़ाई से पालन करने का फैसला किया है.


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