– धानोरकर-वडेट्टीवार संघर्ष से चंद्रपुर कांग्रेस में सियासी तूफान
चंद्रपुर :- महानगरपालिका में कांग्रेस के भीतर चल रहा गुटीय संघर्ष अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों गुटों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ जारी किए गए ‘लेटर बम’ के कारण सामान्य पार्षदों में भारी दहशत और असमंजस का माहौल बन गया है। सांसद प्रतिभा धानोरकर गुट ने वर्तमान गटनेता को बदलने के लिए 15 जून को बैठक बुलाई है, वहीं इसका जवाब देते हुए वडेट्टीवार समर्थक गटनेता राजेश अडूर ने 14 जून को ही बैठक बुलाकर ‘व्हिप’ जारी कर दिया है। भौगोलिक संदर्भ
दोनों पक्षों द्वारा कानूनी कार्रवाई और पार्षदों की सदस्यता रद्द कराने की चेतावनी दिए जाने से कांग्रेस के पार्षद पूरी तरह से दुविधा में फंस गए हैं। उनकी स्थिति “आगे कुआं, पीछे खाई” जैसी हो गई है। कांग्रेस के भीतर गटनेता परिवर्तन को लेकर चल रहे इस ‘ऑपरेशन’ ने पिछले दो दिनों से चंद्रपुर के राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त हलचल मचा दी है। धानोरकर समर्थक 15 पार्षदों के यवतमाल के एक रिसॉर्ट में पहुंचने की खबर सामने आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया था। इसके बाद धानोरकर गुट की ओर से कांग्रेस पार्षदों के घरों पर बैठक संबंधी नोटिस लगाये गये।
इस ‘लेटर बम’ का जवाब देते हुए गटनेता राजेश अडूर ने भी सभी 27 पार्षदों को पत्र भेजकर 14 जून की बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। दोनों पक्षों की ओर से लगातार जारी किए गए इन पत्रों ने पार्षदों के बीच भ्रम और भय का माहौल पैदा कर दिया है।
‘व्हिप’ से पार्षदों की बढ़ी धड़कनें
राजेश अडूर द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 15 जून को बुलाई गई बैठक पूरी तरह अवैध और गैरकानूनी है। इसलिए किसी भी पार्षद को उस बैठक में शामिल नहीं होना चाहिए और न ही किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना चाहिए। इसके विपरीत, 14 जून को आयोजित आधिकारिक बैठक में अनुपस्थित रहने वाले पार्षदों के खिलाफ सीधे ‘अपात्रता की कार्रवाई’ किए जाने की चेतावनी भी दी गई है। इस कड़े व्हिप के बाद पार्षदों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वे किस बैठक में जाएं और किससे दूरी बनाए रखें।
विवाद फिर दिल्ली दरबार पहुंचेगा या अदालत?
कुछ महीने पहले भी महानगरपालिका में गटनेता चयन के दौरान ऐसा ही राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला था। उस समय मामला नागपुर विभागीय आयुक्त कार्यालय से लेकर दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच गया था। अंततः समझौते के तहत राजेश अडूर को गटनेता पद और धानोरकर गुट को महापौर पद का उम्मीदवार देने पर सहमति बनी थी।हालांकि, महज चार महीने बाद यह विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। दोनों गुटों के नेता अपनी-अपनी ताकत झोंकते हुए पार्षदों को अपने पाले में करने के प्रयास में जुटे हैं। इस तीखी गुटबाजी का सबसे अधिक असर पार्षदों पर पड़ रहा है।अब 14 जून की आपात बैठक और 15 जून को धानोरकर गुट की प्रस्तावित बैठक से क्या परिणाम निकलता है, यह विवाद एक बार फिर दिल्ली दरबार तक पहुंचता है या सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाता है, इस पर नजरें टिकी हुई हैं।







