पांढराबोडी तालाब पुनर्जीवन का मुद्दा फिर चर्चा में

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–  ‘अमृत सरोवर’ की घोषणा से व्यवहार्यता रिपोर्ट तक… चार वर्ष बाद भी पुनर्जीवन कार्य की रफ्तार धीमी

– नागरिकों ने फिर शुरू किया स्वच्छता अभियान

नागपुर :- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जुलाई 2022 में पांढराबोडी तालाब को ‘अमृत सरोवर’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। इसके बाद तालाब के पुनर्जीवन के लिए व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) रिपोर्ट तैयार की गई, अनेक तकनीकी सिफारिशें की गईं तथा संबंधित विभागों की बैठकें भी हुईं। इसके बावजूद चार वर्ष बीत जाने के बाद भी तालाब का समग्र पुनर्जीवन कार्य अपेक्षित गति से शुरू नहीं हो सका। परिणामस्वरूप नागरिकों को एक बार फिर स्वयं आगे आकर ‘सेव पांढराबोडी तालाब अभियान’ प्रारंभ करना पड़ा।

रविवार को इस अभियान का लगातार चौथा स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। क्षेत्र के नगरसेवक विनोद कनेरे ने तालाब परिसर का दौरा कर अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों से चर्चा की। स्वयंसेवकों ने तालाब के किनारों पर जमा कचरा तथा निर्माण सामग्री के मलबे को जेसीबी और डंपर की सहायता से हटाने का अनुरोध किया। इस पर तत्काल मशीनें उपलब्ध कराकर बड़ी मात्रा में कचरा हटाया गया तथा शेष कचरा भी अगले दो-चार दिनों में हटाने का आश्वासन दिया गया।

वर्ष 2022 में क्या घोषणा हुई थी?

17 जुलाई 2022 को एलआईटी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पांढराबोडी एवं तेलंगखेड़ी तालाबों का अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत पुनर्जीवन एवं विकास किए जाने की घोषणा की गई थी। तालाब से निकाली जाने वाली गाद का उपयोग सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में करने का प्रस्ताव भी रखा गया था। इसके बाद पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा तैयार व्यवहार्यता रिपोर्ट में तालाब की गाद निकालने, सीवेज का प्रवाह रोकने, प्राकृतिक जलमार्गों को पुनर्स्थापित करने, वेटलैंड विकसित करने, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने, वर्षा जल को तालाब तक पहुंचाने तथा जल भंडारण क्षमता बढ़ाने जैसी अनेक महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई थीं।

नागपुर के वरिष्ठ पर्यावरण प्रेमी एवं “ट्री मैन” के नाम से प्रसिद्ध बाबा देशपांडे ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के निर्देश पर पांढराबोडी तालाब के पुनर्जीवन के लिए विस्तृत व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) रिपोर्ट तैयार कराई गई थी। यह रिपोर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), नागपुर केंद्र के तत्कालीन अध्यक्ष एवं पर्यावरण सलाहकार संदीप शिरखेडकर ने कंटूर मैप सहित तैयार की थी। रिपोर्ट में एलआईटी की पहाड़ियों पर प्रतिवर्ष गिरने वाले लगभग 25 करोड़ लीटर वर्षा जल को वैज्ञानिक तरीके से पांढराबोडी तालाब की ओर मोड़कर उसके जलसंचय को पुनर्जीवित करने का विस्तृत तकनीकी प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। यह रिपोर्ट नागपुर महानगरपालिका के तत्कालीन आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से सौंप दी गई थी।

बाबा देशपांडे ने यह भी बताया कि पांढराबोडी तालाब पुनर्जीवन परियोजना को शीघ्र अमल में लाने की मांग को लेकर 17 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन में व्यवहार्यता रिपोर्ट की सिफारिशों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने तथा इस ऐतिहासिक जलस्रोत के पुनर्जीवन के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णय शीघ्र लेने का आग्रह किया गया था।

रिपोर्ट बनी… आगे क्या हुआ?

व्यवहार्यता रिपोर्ट संबंधित विभागों को सौंप दी गई, अधिकारियों की बैठकें भी हुईं, लेकिन उसके बाद कार्यान्वयन अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध न होने का मुद्दा भी सामने आया था। परिणामस्वरूप रिपोर्ट में दी गई कई महत्वपूर्ण सिफारिशें आज भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं।

आज भी नागरिकों के मन में कई सवाल हैं। अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत घोषित इस महत्वपूर्ण परियोजना का आगे क्या हुआ? व्यवहार्यता रिपोर्ट की सिफारिशों पर अमल क्यों नहीं हुआ? क्या अब भी धन की कमी है? क्या नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) और नागपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (एनआईटी) के पास इस परियोजना के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध नहीं है? इन प्रश्नों पर संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।

नागरिकों ने फिर संभाली जिम्मेदारी

प्रशासनिक प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय नागरिकों ने स्वयं तालाब परिसर की सफाई और संरक्षण का बीड़ा उठाया है। तालाब के चारों ओर से कचरा हटाए जाने के बाद अब उसका वास्तविक स्वरूप धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है और नागरिकों का सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है।

इस अभियान में नागपूर ब्लॉगर्स, रेड स्वस्तिक सोसायटी, ऍग्रोवेट संस्था, इको फ्रेंडली संस्था, अनेकॉन लॅबोरेटरीज, ईशा फाउंडेशन, बाजीप्रभू नगर एवं संजय नगर के निवासी, विजयिनी सखी मंच, तेजस्विनी मंच, टेनिस अकादमी एसोसिएशन (बाजीप्रभू नगर), ग्रीन नागपुर ग्रुप, अवंती भूमि ट्री फाउंडेशन ग्रुप, संपर्क एवं संवाद ग्रुप, मिशन सेव पांढराबोडी लेक ग्रुप सहित अनेक सामाजिक संस्थाएं, पर्यावरण प्रेमी नागरिक तथा स्वयंसेवक सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहे हैं।

जल अभ्यासक , जल योद्धा डॉ. प्रवीण डबली का कहना है, की “पांढराबोडी तालाब का पुनर्जीवन केवल एक तालाब का विषय नहीं, बल्कि नागपुर की जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। वर्ष 2022 में घोषणा हुई, व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार हुई, लेकिन अपेक्षित गति से कार्य नहीं हो सका। इसलिए नागरिकों को फिर से आगे आना पड़ा है। हमारा उद्देश्य प्रशासन का विरोध करना नहीं, बल्कि जनसहभागिता के माध्यम से प्रशासन के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक जलस्रोत को पुनर्जीवित करना है। शासन, एनएमसी, एनआईटी तथा जनप्रतिनिधियों को अब समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना चाहिए।”

डॉ. डबली के अनुसार, पांढराबोडी तालाब का पुनर्जीवन केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। व्यवहार्यता रिपोर्ट में सुझाई गई सभी सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू करना आवश्यक है। तालाब के मूल जलग्रहण क्षेत्र को पुनर्स्थापित करना, सीवेज का प्रवाह पूरी तरह रोकना, गाद निकालना, हरित क्षेत्र विकसित करना तथा जनसहभागिता के माध्यम से तालाब का दीर्घकालीन संरक्षण सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

“जल है तो कल है” के संदेश के साथ नागरिकों द्वारा शुरू किया गया यह जनअभियान अब प्रशासन से ठोस, समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहा है।

– डॉ. प्रवीण डबली