spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

गोरेवाड़ा का नाम बड़ा, पिंजरों का हाल छोटा

– 22 बाघों के लिए महज 10 पिंजरे, बढ़ती वन्यजीव संख्या ने खोली व्यवस्थाओं की पोल

नागपुर :- देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुका बालासाहब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान अपनी विशालता के बावजूद व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। करीब 1,914 हेक्टेयर में फैले इस प्राणी उद्यान में वन्यजीवों के उपचार और संरक्षण के लिए रेस्क्यू सेंटर भी संचालित है। हालांकि, यहां बाघों समेत अन्य वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के मुकाबले उपलब्ध पिंजरों की क्षमता कम पड़ती दिखाई दे रही है।

जनवरी 2021 में शुरू हुए गोरेवाड़ा जू को पांच वर्ष से अधिक समय हो चुका है। रेस्क्यू सेंटर में घायल बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों को उपचार के लिए रखा जाता है। जानकारी के अनुसार, यहां बाघों के लिए 10 और तेंदुओं के लिए 20 पिंजरे उपलब्ध हैं। इसके मुकाबले रेस्क्यू सेंटर में एक समय 22 बाघ और 34 से अधिक तेंदुए रखे गए थे। ऐसे में पिंजरों की क्षमता और वन्यजीवों की संख्या के बीच अंतर साफ नजर आता है।

क्षमता से ज्यादा वन्यजीव, बढ़ी परेशानी

वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण रेस्क्यू सेंटर में उपलब्ध जगह का दबाव बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि कुछ मामलों में बाघों को तेंदुओं के तथा तेंदुओं को अन्य वन्यजीवों के लिए निर्धारित स्थानों में रखने की नौबत आने की बात सामने आई है। हालांकि, अतिरिक्त वन्यजीवों को दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है, लेकिन इससे फिलहाल दबाव कम हो सकता है। मूल समस्या पिंजरों और आवश्यक सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने से ही दूर होगी।

वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि इतने बड़े प्राणी उद्यान और रेस्क्यू सेंटर में बड़े वन्यजीवों के लिए पर्याप्त एवं मानक अनुरूप व्यवस्था होना जरूरी है। केवल स्थानांतरण के जरिए मौजूदा समस्या का समाधान लंबे समय तक नहीं किया जा सकता।

बढ़ती बाघ संख्या के साथ चुनौती भी बढ़ेगी

विदर्भ में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में बाघों की संख्या 444 थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर 600 से अधिक हो गई है। राज्य में बाघों और तेंदुओं की बड़ी आबादी विदर्भ के जंगलों में है।

नागपुर में गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर के साथ ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं। ऐसे में जंगलों में वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ घायल या संघर्ष की घटनाओं में प्रभावित वन्यजीवों को उपचार के लिए यहां लाए जाने की संभावना भी बढ़ेगी।

पिंजरों के साथ मैनपावर बढ़ाना जरूरी:

वन्यजीवों के बढ़ते आवासीय दबाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए भविष्य की जरूरतों को अभी से ध्यान में रखना होगा। रेस्क्यू सेंटर में पर्याप्त संख्या में नए और मानक अनुरूप पिंजरों के साथ वन्यजीवों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित मैनपावर बढ़ाना भी जरूरी है।

22 बाघों के लिए 10 पिंजरे फिलहाल केवल एक तस्वीर है; आने वाले वर्षों में बढ़ती वन्यजीव संख्या के साथ असली चुनौती इससे कहीं बड़ी हो सकती है।


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.

Copyright Disclaimer: If Any Image, video or article belongs to its respective owner/creator. Full credit goes to the original creator. No copyright infringement intended.