– शिक्षण संस्थाचालकों से आंदोलन के बजाय सरकार से संवाद की अपील
नागपुर :- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद उनसे शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने की उम्मीद है, ऐसा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा। वे रविवार को सक्करदरा स्थित कमला नेहरू महाविद्यालय में महाराष्ट्र राज्य शिक्षण संस्था महामंडल की ओर से आयोजित नागपुर एवं अमरावती विभाग के संयुक्त अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर बोल रही थीं।
सुले ने कहा कि कई वर्षों तक सत्ता में रहने के दौरान उन्हें आंदोलन करने की जरूरत महसूस नहीं हुई। लेकिन अब विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन करने की स्थिति पैदा हो रही है। शिक्षा संस्थाचालकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की भाषा अपनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य इस समय बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षण संस्थाचालकों से आंदोलन करने के बजाय अगले तीन महीनों के लिए एक समिति गठित कर सरकार के साथ चर्चा करने और विभिन्न समस्याओं का समाधान निकालने का सुझाव दिया। ‘मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ हमारे मतभेद हैं, लेकिन वे हमारे प्रश्नों को न्याय देंगे, ऐसी अपेक्षा है,’ ऐसा सुले ने कहा।
स्कूलों को समय पर अनुदान नहीं मिलना भी समस्या
सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में शिक्षा संस्थाओं की स्थापना के मूल उद्देश्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों के साथ अनुदानित स्कूलों की व्यवस्था विकसित की गई थी। हालांकि, आज इन स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों को समय पर अनुदान नहीं मिलने और कर्मचारियों की भर्ती प्रभावित होने के कारण शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थाचालकों की सामाजिक प्रतिष्ठा भी पहले की तुलना में कम हुई है। संस्थाचालकों को अपनी कार्यप्रणाली और शैक्षणिक योगदान के माध्यम से समाज में फिर से सम्मान हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।





