– नकली लेबल और फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए स्वीडन में संदिग्ध दवाएं भेजने का आरोप
नागपुर :- महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने नागपुर स्थित फार्मास्युटिकल फर्म एम/एस स्काईलाइन इम्पेक्स के साझेदारों, कथित सप्लायर और अन्य लोगों के खिलाफ संदिग्ध नकली दवाओं की आपूर्ति, नकली लेबल और फर्जी गुणवत्ता प्रमाणपत्र के इस्तेमाल के आरोप में मामला दर्ज कराया है। आरोप है कि कंपनी के माध्यम से स्वीडन के एक ग्राहक को संदिग्ध दवाएं भेजी गई थीं।मामला एफडीए की औषधि निरीक्षक स्वाति सुधाकर भारदे की शिकायत पर जरिपटका पुलिस थाने में दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार, स्वीडन निवासी टॉमी ब्लोमक्विस्ट ने इंडिया मार्ट के माध्यम से स्काईलाइन इम्पेक्स से मोटस-सी और अन्य ‘रिसर्च पेप्टाइड्स’ खरीदे थे। जांच के दौरान एक नमूने की प्रयोगशाला जांच में उसमें सक्रिय पदार्थ नहीं पाए जाने की बात सामने आई।
एफडीए की जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि उत्पादों पर अमेरिका की कंपनी पेपटाइड साइंसेस, यूएसए से संबंधित ब्रांडिंग का इस्तेमाल किया गया था। संबंधित अमेरिकी कंपनी ने कथित तौर पर एफडीए को बताया कि उत्पादों पर लगे लेबल और डिजाइन वास्तविक नहीं थे।
कंप्यूटर में मिले फर्जी प्रमाणपत्र
25 जून को एफडीए अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम में फर्जी सर्टििफकेट ऑफ एनेलिसिस और नकली उत्पाद लेबल से संबंधित डिजाइन मिले। जांच अधिकारियों के अनुसार, विवादित लेबल पर क्यूआर कोड भी लगाए गए थे। आरोप है कि इन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संबंधित विदेशी कंपनी की वास्तविक वेबसाइट खुलती थी, जिससे उत्पाद असली होने का भ्रम पैदा हो सकता था।
2 हजार वायल जब्त
एफडीए की कार्रवाई के दौरान करीब 2,000 वायल बैक्टीरियोस्टेटिक वाटर इंजेक्शन भी बरामद किए गए। इन पर ‘For Export Only’ लिखा हुआ था। इसके दो बैच के नमूने सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए। जांच में दोनों नमूनों को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया गया। नमूने बैक्टीरियल एंडोटॉक्सिन, पीएच और पार्टिकुलेट मैटर से संबंधित परीक्षणों में कथित तौर पर विफल रहे।
नागपुर और पंजाब के आरोपियों पर मामला:
पुलिस ने जरिपटका निवासी और स्काईलाइन इम्पेक्स के साझेदार यश सेवेंद्र बेरी के साथ पंजाब के जीरकपुर निवासी कथित सप्लायर मनहिर सिंह, कथित निर्माता एम/एस डॉ. ग्लेक्स फार्माकेम और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 276, 277, 278, 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है।जांच में स्वीडन भेजी गई खेप से जुड़े दस्तावेजों में कथित रूप से कम कीमत दिखाने और शिपिंग दस्तावेजों में हेरफेर किए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
एफडीए ने रद्द किए दवा लाइसेंस
जांच के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्काईलाइन इम्पेक्स के थोक दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। पुलिस और एफडीए की टीमें कथित नकली लेबलिंग, गुणवत्ता प्रमाणपत्र में हेरफेर, दवाओं की आपूर्ति और निर्यात दस्तावेजों से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही हैं।





