23 सितंबर की जांच में अधिकारी नहीं पहुंचे, जांच दल पर संदेह
देवेन्द्र दमाहे :- पिंडकेपार ग्राम पंचायत में ग्रामसभा विवाद और विकास कार्यों से जुड़े मामले की 23 सितंबर को प्रस्तावित जांच नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं पिंडकेपार निवासी सुरेंद्र गेडाम ने आरोप लगाया कि पंचायत समिति के गटविकास अधिकारी के निर्देशानुसार जांच होनी थी, लेकिन जांच अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
गेडाम के अनुसार, अधिकारी से फोन पर संपर्क करने पर बताया गया कि, आज हमारा प्रशिक्षण है, इसलिए हम बाहर जा रहे हैं। गेडाम ने जांच स्थगित होने की लिखित सूचना मांगी, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई पत्र नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि 23 सितंबर की जांच आखिर क्यों नहीं हुई और क्या किसी के दबाव में जांच रोकी गई? कुछ ग्रामीणों ने भी किसी को बचाने की आशंका जताई है। आर्थिक लेन-देन की आशंका संबंधी चर्चाएं भी हैं।
इधर सरपंच शालिनी राऊत ने पंचायत की बदनामी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। गेडाम का कहना है कि विकास कार्यों की जानकारी मांगना और सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है।
दो दिन का अल्टीमेटम
गेडाम ने चेतावनी दी कि दो दिनों में जांच शुरू नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो पंचायत समिति के बीडीओ कक्ष में ठिया आंदोलन किया जाएगा।
अब जिला परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका पर ग्रामीणों की नजर है। जांच कब होगी और जांच में देरी का वास्तविक कारण क्या है, यह प्रशासन की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।





