बायोचार से शाश्वत खेती को मिल सकती है नई दिशा

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– मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाना जरूरी; बड़े पैमाने पर उत्पादन की जरूरत:नितिन गडकरी

नागपुर :- खेती के विकास के लिए बेहतर बीज, नियमित मिट्टी परीक्षण और मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाना बेहद जरूरी है। जैविक कार्बन मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है और इसे बढ़ाने में बायोचार प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है। बड़े पैमाने पर बायोचार का उत्पादन कर खेती में इसका उपयोग करने से शाश्वत खेती को नई दिशा मिल सकती है। यह विश्वास केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने व्यक्त किया। एग्रोविज़न फाउंडेशन की ओर से शनिवार को होटल तुली इम्पीरियल में आयोजित ‘बायोचार निर्माण परिषद’ का उद्घाटन गडकरी ने किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा किसान उपस्थित रहे। गडकरी ने कहा कि जैविक कार्बन बढ़ने से कृषि उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। उत्पादन के साथ गुणवत्ता और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने पर किसानों की आय में भी इजाफा संभव है। उन्होंने कहा कि बायोचार जैसी तकनीकों की आर्थिक व्यवहार्यता साबित कर उन्हें बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

कम लागत में बायोचार निर्माण पर मार्गदर्शन:

पूर्व सीआईसीआर निदेशक एवं आईसीएसी, वाशिंगटन डीसी के तकनीकी सूचना विभाग के प्रमुख डॉ. केशव क्रांति ने कम लागत में बायोचार तैयार करने की सरल तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कपास के अवशेष और अन्य कृषि कचरे से बायोचार बनाने की प्रक्रिया समझाई। परिषद में अजय कुमार मठपती और विनायक पाटील ने एफपीओ या सहकारी संस्था के माध्यम से कृषि कचरा एकत्र कर बड़े पैमाने पर बायोचार उत्पादन का सुझाव दिया। कार्यक्रम में डॉ. हरिहर कौसडीकर, डॉ. सदाशिव निबाळकर, संदीप जोशी, समीर शर्मा सहित विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया।

क्या है बायोचार?

फसल अवशेष, भूसा, कचरा, टहनियां, नारियल के छिलके जैसे जैविक पदार्थों को सीमित ऑक्सीजन और नियंत्रित तापमान में परिवर्तित करने से तैयार कार्बन युक्त पदार्थ को बायोचार कहा जाता है। उचित तरीके से तैयार और इस्तेमाल करने पर यह मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने, मिट्टी की संरचना सुधारने तथा पानी और पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद कर सकता है।