– कोर्ट ने कहा- यह राष्ट्रीय समस्या
नई दिल्ली :- सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बच्चों के लापता होने के बढ़ते मामलों और इस समस्या पर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चों की गुमशुदगी के मामले किसी एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। कोर्ट ने लापता बच्चों की बरामदगी के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और शुरुआती स्तर पर की गई प्रभावी कार्रवाई ही बच्चे के सुरक्षित मिलने की संभावना को तय करती है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ तमिलनाडु से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्ष 2011 में 22 महीने की बच्ची के लापता होने का मामला सामने आया था। पीठ ने कहा कि इतने वर्षों बाद अब जाकर राज्य सरकार इस मामले में सक्रिय होती दिखाई दे रही है। पीठ ने कहा कि लापता बच्चों के मामले केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। यह एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। इसके बावजूद कई राज्य सरकारें इन मामलों को आवश्यक प्राथमिकता नहीं दे रही हैं। अदालत का प्रयास होगा कि पूरे देश में लागू होने वाली एक समान एसओपी तैयार की जाए, क्योंकि ऐसे मामलों में समय की भूमिका सबसे निर्णायक होती है। अदालत ने केंद्र को गृह सचिव के माध्यम से सभी राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।