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गुणवत्ता को लेकर मिल रही शिकायतों पर प्रशासन सतर्क

– स्कूलों में पोषाहार का होगा ऑडिट

– जिले के 2 हजार 711 स्कूलों का समावेश

 नागपुर :- पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है. उसमें से जिले के 2 हजार 711 स्कूलों के 2 लाख 78 हजार 767 विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलता है. हालाँकि, प्रशासन ने सरकारी नियमों के अनुसार भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और नियमितता की जाँच के लिए पोषण योजना का ऑडिट कराने का निर्णय लिया है.

बच्चों को स्कूल से जुड़ाव महसूस कराने और कक्षा में उपस्थिति बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा विद्यालय पोषण योजना लागू की गयी है. मध्यावधि अवकाश के बाद विद्यार्थियों को गर्म पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है. नागपुर जिले के 2 हजार 711 स्कूलों के विद्यार्थियों को यह पोषण आहार दिया जा रहा है. कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को निश्चित कैलोरी एवं प्रोटीनयुक्त भोजन उपलब्ध कराने का मापदंड तय किया गया है.

प्राथमिक स्तर पर न्यूनतम 45० कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन और उच्च प्राथमिक स्तर पर 7०० कैलोरी और 2० ग्राम प्रोटीन अपेक्षित है. सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के लिए कि भोजन स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक है, रसोई की सफाई, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल और खाना पकाने वाले कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच पर विशेष जोर दिया जाता है. साथ ही हर स्कूल में स्वाद परीक्षण के बाद ही छात्रों को भोजन उपलब्ध कराना अनिवार्य है. इसके लिए प्रधानाचार्य या शिक्षक की जिम्मेदारी तय की गई है. यह योजना जिला परिषद, स्थानीय स्व-सरकारी निकायों और कुछ निजी स्कूलों में लागू की गई है. इस योजना के कार्यान्वयन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ-साथ केंद्रीय रसोई प्रणाली का उपयोग किया जाता है. कुछ स्कूलों में, खाना स्थानीय स्तर पर बनाया जाता है, जबकि अन्य में, केंद्रीय रसोई से भोजन उपलब्ध कराया जाता है.

योजना में पारदर्शिता लाने का प्रयास करेंगे

इस पृष्ठभूमि में, ऑडिट यह जांचने जा रहा है कि क्या भोजन समय पर परोसा जाता है, क्या भोजन निर्धारित मेनू के अनुसार परोसा जाता है, क्या छात्र उपस्थिति और भोजन वितरण में कोई विसंगति है. साथ ही खाद्य भंडारण, साफ-सफाई, गैस सिलेंडर की उपलब्धता और खाना पकाने की सुरक्षा की भी जांच की जाएगी. पिछले कुछ वर्षों में पोषण की गुणवत्ता को लेकर मिल रही शिकायतों ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है. इसलिए इस ऑडिट के माध्यम से योजना में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ त्रुटियां ढूंढने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रयास किया जाएगा.

प्रधानाध्यापक की जेब अब ढिली

स्कूल पोषण सब्सिडी खाते में जमा की जाती है. महिला स्वयं सहायता समूहों को सब्सिडी दी जाती है. लेकिन समय पर अनुदान नहीं मिलने के कारण अक्सर प्रधानाध्यापक को विद्यालय पोषाहार की राशि का भुगतान करना पड़ता था. बताया जाता है कि स्कूल पोषाहार की सब्सिडी पिछले छह माह से नहीं आयी है. इसी बीच प्रधानाध्यापक की जेब जल गयी. इससे कई प्राचार्य नाराज हैं.

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