नागपुर :- नगर निगम चुनाव में 151 सीटों के लिए हुए मुकाबले में पहली बार 79 महिला पार्षद चुनी गईं, जबकि 72 पुरुष पार्षद चुने गए. इसलिए, अब नागपुर नगर निगम में महिलाओं का शासन होगा. 5० प्रतिशत आरक्षण का यह लाभ स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. नगर निगम आरक्षण 1 के ड्रॉ में, प्रत्येक वार्ड में अन्य पिछड़ा वर्ग (बी) की महिलाओं और सामान्य (सी) वर्ग की महिलाओं के लिए 1-1 आरक्षण था. इसलिए, नगर निगम में 5० प्रतिशत महिला पदाधिकारी होनी थीं. लेकिन साथ ही, अन्य श्रेणियों की महिला उम्मीदवारों ने भी चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसमें भाजपा की अधिकतम 53 महिला उम्मीदवार चुनी गईं. वहीं, कांग्रेस की 16 महिला उम्मीदवार विजयी रहीं.
महिला महापौर?
महानगरपालिका के महापौर कौन होंगे, इस बारे में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. पता चला है कि इस संबंध में राजनीतिक पैरवी भी की जा रही है. यह तर्कदिया जा रहा है कि चूंकि महिलाओं को पहली बार इतने अधिक अवसर मिल रहे हैं, तो क्या महापौर भी एक महिला ही होंगी?
क्या महिलाओं के मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी?
शहर में महिलाओं से जुड़ी कई अन्य सामाजिक समस्याएं भी हैं, जिनमें महिलाओं के लिए शौचालयों की कमी और यात्रा के दौरान असुरक्षित वातावरण शामिल हैं. कई क्षेत्रों में अभी भी महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण नहीं है. इसलिए, इस अवसर पर यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में महिलाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर संबोधित किया जाएगा. भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से एक-एक महिला पार्षद चुनी गईं, जबकि 72 पुरुष पार्षदों को यह अवसर मिला.