– सतर्कता बरतने से बड़ी आर्थिक हानि टल गई
नागपुर :- नागपुर में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों का नाम इस्तेमाल कर साइबर ठगी करने का गंभीर मामला सामने आया है. ठगों ने स्वयं को सीआईएसएफ कमांडेंट और मेजर बताकर एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ से लाखों रुपये की ठगी करने का प्रयास किया. हालांकि समय रहते सतर्कता बरतने से बड़ी आर्थिक हानि टल गई.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ भारतीय बाल रोग अकादमी के पूर्व राष्ट्र्रय अध्यक्ष डॉ. उदय बोधनकर को सुबह एक फोन कॉल आया. कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीआईएसई कमांडेंट बताते हुए सीआईएसएफ कर्मियों के लगभग 9० बच्चों के मेडिकल चेक-अप की मांग की.
देश की सुरक्षा में लगे जवानों के प्रति सम्मान भाव रखते हुए डॉ. बोधनकर ने मानवीय आधार पर यह जांच नि:शुल्क करने की सहमति दी. लेकिन बातचीत के दौरान कॉल करने वाले व्यक्ति ने अचानक 5० हजार रुपये अग्रिम देने की बात कहते हुए कोड साझा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर स्वयं को मेजर रावत बताते हुए फोन के मैनेज अथवा सेटिंग ऑप्शन पर क्लिक करने को कहा. इससे संदेह और गहरा गया. यदि फोन उस नंबर से लिंक हो जाता तो संबंधित व्यक्ति डॉक्टर के बैंक खाते से पूरी राशि निकाल सकता था. स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत सभी प्रक्रियाएं रोक दी गईं, जिससे संभावित ठगी टल गई.
कॉल के समय मौके पर उपस्थित नियोग थेरेपिस्ट डॉ. प्रवीण डबली ने पूरे घटनाक्रम को ध्यानपूर्वक देखा और इसे साइबर फ्रॉड का प्रयास बताते हुए तुरंत सतर्क किया. उनकी सूझबूझ के कारण कोई भी वित्तीय लेन-देन होने से पहले ही रोक दिया गया.
क्राइम विभाग में विधिवत शिकायत दर्ज
इसके बाद सभी संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिए गए. साथ ही स्क्रीनशॉट, फर्जी पहचान पत्रों की तस्वीरें और मोबाइल नंबरों के साथ साइबर क्राइम विभाग में विधिवत शिकायत दर्ज कराई गई.
डॉ. उदय बोधनकर ने कहा कि, साइबर ठग अब सेना, पुलिस और सरकारी संस्थानों के नाम का सहारा लेकर लोगों की भावनाओं से खेल रहे हैं. जागरूकता और सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है. डॉ. प्रवीण डबली की समझदारी के कारण एक बड़ी ठगी होने से बच गई. हम डिजिटल युग में प्रवेश कर चुके हैं, इसलिए सरकार को ऐसे मोबाइल नंबरों को ट्रैक कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.




