– आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
– 2 करोड़ 79.5 लाख टन होने का अनुमान
नागपुर :- संतरों के लिए देश-विदेश में मशहूर नागपुर अब दुर्लभ खनिज रेयर अर्थ एलिमेंट्स के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बिखेरेगा. देश के केंद्र में स्थित होने से नागपुर का हर क्षेत्र में आज काफी महत्व है. व्यवसाय से लेकर बड़े-बड़े फ्लाईओवर, मिहान, मेट्रो सहित विविध प्रोजेक्ट के साथ राजनीति के क्षेत्र में भी ऑरेंज सिटी का बड़ा नाम है. अब रेयर अर्थ एलिमेंट्स की जानकारी मिलना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. खनिज ब्लॉक के ब्योरे के अनुसार आरईई ब्लॉक नागपुर जिले की रामटेक तहसील के कवलापुर गांव में है और लगभग 398.23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है. इस ब्लॉक में दुर्लभ खनिज के भूशास्त्रीय स्रोत लगभग 2 करोड़ 79.5 लाख टन होने का अनुमान है. कोल इंडिया लिमिटेड इसकी खुदाई करेगी. इसके लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) को खनन मंत्रालय से खनिज रियायत लाइसेंस मिला है. कंपनी ने इस क्षेत्र में कदम रखते हुए एक अहम उपलब्धि हासिल की है. यह लाइसेंस कंपनी को 5 वर्षों के लिए दिया गया है. इतनी बड़ी मात्रा में संसाधन मिलने से यह ब्लॉक रणनीतिक रूप से काफी अहम बन जाता है.
जानकारी के अनुसार दुर्लभ खनिज आज की आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं. इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, कम्प्यूटर, सोलर पैनल, पवन ऊर्जा उपकरण, इलेट्रिक वाहनों, बैटरियों और यह विकासक्रम भारत सरकार के उस लक्ष्य से भी मेल खाता है जिसमें रणनीतिक रूप से जरूरी खनिजों के घरेलू स्रोतों को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है. फिलहाल भारत कई दुर्लभ खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भर है. रामटेक के कवलापुर जैसे प्रोजेक्ट से देश को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी और तकनीकी व नागपुर के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी. कुल मिलाकर महाराष्ट्र में कवलापुर दुर्लभ खनिज ब्लॉक के लिए लाइसेंस मिलना कोल इंडिया के लिए एक बड़ा कदम है. यह न केवल कंपनी के भविष्य के विकास की दिशा तय करता है बल्कि भारत की खनिज नीति और आत्मनिर्भरता के प्रयासों को भी मजबूत करता है. आने वाले वर्षों में यह प्रोजेक्ट देश की अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रगति में अहम भूमिका निभा सकता है.
रक्षा उपकरणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है. आने वाले समय में जब रिन्युअल एनर्जी और इलेट्रिक परिवहन पर जोर बढ़ेगा तब दुर्लभ खनिजों की मांग और भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में इन खनिजों के घरेलू स्रोतों का विकास देश के लिए बहुत जरूरी हो गया है. अब तक कोल इंडिया मुख्य रूप से कोयला उत्पादन के लिए जानी जाती रही है लेकिन हाल के वर्षों में कंपनी ने अपने कारोबार में विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. दुर्लभ खनिज ब्लॉक का यह लाइसेंस इसी रणनीति का हिस्सा है. इससे कोल इंडिया न सिर्फ कोयले पर अपनी निर्भरता कम करेगी बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नये क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करेगी. वहीं आरईई पर चीन पर निर्भरता कम होगी.