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सोना–चांदी के बढ़ते दामों पर भ्रम या साजिश!

सरकार कहती है अर्थव्यवस्था मजबूत है, फिर क्यों आसमान छू रहे हैं दाम? जवाब आर्थिक हकीकत में छिपा है या कुछ और

देश में पिछले कुछ महीनों से सोना और चांदी के दामों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी देखी जा रही है। अक्टूबर 2025 में सोने की कीमत ₹1.30 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुँच चुकी है, जबकि चांदी ₹1.8 लाख प्रति किलो के आसपास बिक रही है। आम लोगों में इस तेजी को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है — कई लोग इसे आर्थिक संकट या किसी अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र से जोड़ रहे हैं।

लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस बढ़ोतरी के पीछे कोई रहस्य नहीं, बल्कि स्पष्ट आर्थिक और वैश्विक कारण हैं। आइए इन्हें एक-एक कर सरल भाषा में समझते हैं।

-अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेज़ी का सीधा असर

इस व्यवसाय से जुड़े जानकार बताते है कि सोने की कीमतें केवल भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में ऊँचाई पर हैं। इस साल अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 4,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस का स्तर पार कर गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, डॉलर की कमजोरी और भूराजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक निवेशकों ने सोने को ‘Safe Haven’ यानी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चुना।

जब दुनिया भर में मांग बढ़ती है, तो भारत जैसे आयातक देशों में इसका सीधा असर दिखाई देता है।

रुपया कमजोर, आयात महंगा

भारत अपनी ज्यादातर सोना–चांदी की जरूरतें विदेशों से आयात कर पूरा करता है। इन धातुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है। फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹88.7 के स्तर पर है, यानी रुपया कमजोर हुआ है।

इसका मतलब — भले ही वैश्विक कीमतें स्थिर रहें, कमजोर रुपया भारत में सोना–चांदी को और महंगा बना देता है।

केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद से बढ़ी मांग

विशेषज्ञ बताते है कि कई देश अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। चीन, रूस और कई एशियाई देशों ने हाल के महीनों में बड़ी मात्रा में सोना खरीदा है। जब इतने बड़े पैमाने पर खरीद होती है, तो बाजार में आपूर्ति घटती है और दाम बढ़ जाते हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।

औद्योगिक मांग से चांदी में तेज़ी

विशेषज्ञ आगे बताते है कि चांदी सिर्फ गहनों या निवेश के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योगों में भी बड़ी मात्रा में उपयोग होती है — जैसे सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन। 2025 में औद्योगिक मांग तेजी से बढ़ी, जबकि आपूर्ति सीमित रही। यही कारण है कि चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली। भारत में तो स्थिति इतनी तेज रही कि कुछ म्यूचुअल फंड हाउसों ने Silver ETF में नई निवेश योजनाएँ अस्थायी रूप से रोक दीं।

घरेलू मांग और त्योहारी सीजन ने जोड़ा दबाव

स्थानीय व्यापारी भी बताते है कि भारत में त्योहारों, शादियों और धार्मिक अवसरों पर सोना–चांदी खरीदने की परंपरा है। वर्तमान में त्योहारी सीजन के चलते घरेलू मांग बढ़ी हुई है। यह मांग तब और महंगी पड़ती है जब वैश्विक कीमतें पहले से ऊँची हों और रुपया कमजोर हो। इस दोहरी स्थिति के कारण स्थानीय बाजार में प्रीमियम बढ़ गया — यानी अंतरराष्ट्रीय कीमतों से भी ज्यादा दाम पर सोना–चांदी बिक रहा है।

साज़िश’ नहीं, आर्थिक सच्चाई

शहर के एक सोना चांदी के व्यापारी ने बताया कि कई जगह यह धारणा बन रही है कि कीमतों में तेजी किसी अंतरराष्ट्रीय साज़िश का हिस्सा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था, डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और आपूर्ति–मांग के संतुलन से तय होती हैं। बड़े निवेशक कभी-कभी बाजार में हलचल जरूर ला सकते हैं, लेकिन इसे षड्यंत्र कहना अतिशयोक्ति है।

आम लोगों को क्या समझना चाहिए

1. सोना–चांदी के बढ़ते दामों का अर्थ यह नहीं कि देश की अर्थव्यवस्था कमजोर है।

2. यह एक वैश्विक आर्थिक परिघटना है, जिसमें भारत एक आयातक देश होने के कारण प्रभावित होता है।

3. खरीदते समय बाजार के प्रीमियम और रुझान को समझना जरूरी है।

4. निवेश के लिए जल्दबाजी में ऊँचे भावों पर खरीद करने से पहले लंबी अवधि की रणनीति बनाएं।

वे कहते हैं कि सोना–चांदी के आसमान छूते दामों के पीछे न तो कोई गूढ़ रहस्य है और न ही कोई वैश्विक षड्यंत्र। इसके पीछे ठोस आर्थिक कारण हैं — वैश्विक बाजार में मांग का बढ़ना, डॉलर के मुकाबले रुपए का कमजोर होना, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, औद्योगिक मांग और घरेलू त्योहारी खरीद है। इसलिए ज़रूरी है कि लोग अफवाहों में न पड़कर तथ्यों को समझें और समझदारी से फैसले लें।

चांदी ₹2 लाख, सोना ₹1.35 लाख !

अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, बढ़ती औद्योगिक मांग, त्यौहारी ग्राहकी और अमेरिकी टैरिफ सहित इंटरनेशनल मार्केट में अस्थिरता के माहौल के मद्देनजर सोना-चांदी में जारी बंपर तेजी को देखते हुए दिवाली तक सोने का रेट प्रति 10 ग्राम 135000 और चांदी का रेट प्रति किलो 2 लाख रुपए तक जाने का अनुमान एआईजीजेसी के चेयरमैन ने जताया है

अक्तूबर में ऐसे चढ़े सोना चांदी के रेट

तारीख सोना चांदी

1 अक्तूबर। ₹1,17,600 ₹1,46,500

6 अक्तूबर। ₹1,19,600 ₹1,50,700

10 अक्तूबर ₹1,22,000 ₹1,67,200

11 अक्तूबर ₹1,23,500 ₹1,81,000

14 अक्टूबर ₹1,30,800 ₹1,85,000

*सोने का रेट प्रति 10 ग्राम और चांदी का रेट प्रति किलो है, जीएसटी, मेकिंग चार्ज एवं हॉलमार्क चार्ज अतिरिक्त

– डॉ प्रवीण डबली,वरिष्ठ पत्रकार


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