– 10 अक्टूबर को महाराष्ट्र में गरजेंगे किसान-मजदूर
– 100 रुपये प्रति एकड़ मदद नहीं, न्याय चाहिए—किसानों की 10 सूत्रीय मांगों के साथ राज्यव्यापी आंदोलन का एलान
छत्रपति संभाजीनगर :- राज्य में सूखा लागू करने, किसानों और खेतिहर मजदूरों के सभी कर्ज माफ करने और सभी प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा देने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर 10 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। यह निर्णय अखिल भारतीय किसान सभा, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) और अखिल भारतीय खेत मजदूर संघ की एक संयुक्त ऑनलाइन बैठक में लिया गया, ऐसा कॉमरेड डॉ. अजीत नवले ने बताया।
इन तीनों संगठनों ने हाल ही में सूखा प्रभावित मराठवाड़ा का संयुक्त दौरा किया था। इन मुद्दों को लेकर मराठवाड़ा संभाग के सभी आठ जिलों से 30 सितंबर को छत्रपति संभाजीनगर संभागीय आयुक्त कार्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला गया था। अब इस विरोध प्रदर्शन का विस्तार करते हुए 10 अक्टूबर को पूरे महाराष्ट्र के सभी तहसील और जिला कलेक्टर कार्यालयों तक मार्च निकाला जाएगा और सूखा प्रभावित किसानों से जुड़े मुद्दों को केंद्र तक पहुँचाया जाएगा।
किसानों को प्रति एकड़ 100 रुपये दिए जाएँगे। यह आंदोलन फसल क्षति के लिए 50,000 रुपये मुआवजा देने, कृषि मजदूरों को श्रम हानि के लिए 30,000 रुपये मुआवजा देने, ऋण माफी योजना में बचत समूहों, साहूकारों और माइक्रोफाइनेंस ऋणों के साथ फसल और कृषि ऋण सहित किसानों और कृषि मजदूरों के सभी ऋणों को माफ करने, छात्रों की फीस माफ करने, फसल बीमा के हटाए गए ट्रिगर को फिर से लागू करने और रोजगार गारंटी योजना से कार्यों को हटाकर सरकारी खर्च पर कृषि, पशुधन, घरों और गौशालाओं को हुए नुकसान को कवर करने जैसी 10 मांगों को लेकर शुरू किया गया है।
भारी बारिश के कारण राज्य में वर्तमान में किसानों और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। भारी नुकसान के कारण किसान, खेतिहर मजदूर, ग्रामीण श्रमिक और कर्मचारी बेसहारा हो गए हैं। हालाँकि, राज्य सरकार ऐसी विकट परिस्थितियों में भी केवल मदद की पेशकश कर रही है। इससे किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण श्रमिकों में सरकार के प्रति तीव्र असंतोष है। इस असंतोष को अन्यत्र मोड़ने के लिए विभिन्न किसान जातियों के बीच संघर्ष भड़काए जा रहे हैं। एक-दूसरे पर गंदे आरोप लगाकर कृषि और मिट्टी के मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश रची जा रही है।
मराठवाड़ा से उठी हुंकार अब पूरे महाराष्ट्र में गूंजेगी
ऐसी स्थिति में, तीनों संगठनों ने कृषि और मिट्टी के मुद्दों को केंद्र में बनाए रखने के लिए हाथ मिलाया है।
10 अक्टूबर को राज्यव्यापी आंदोलन के बाद भी, यदि सरकार उपरोक्त मांगें नहीं मानती है, तो इन संगठनों ने और भी तीव्र आंदोलन करने का निर्णय लिया है। ऑनलाइन बैठक में डॉ. अशोक धवले, नरसय्या आदम, जे. पी. गावित, डॉ. अजीत नवले, डॉ. डी. एल. कराड, एम. एच. शेख, नाथू साल्वे, मारोती खंडारे, उमेश देशमुख आदि उपस्थित थे।








