– 1,122 परिवारों का पुनर्वास, प्रत्येक को 15 लाख रुपये मुआवज़ा
नागपुर :- बोर टाइगर रिजर्व के विस्तार को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब वन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके तहत रिजर्व का क्षेत्र बढ़ेगा और प्रभावित वनवासियों का पुनर्वास किया जाएगा। इससे न केवल बाघों के संरक्षण को बल मिलेगा बल्कि वर्षों से विस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों को भी नया जीवन मिलेगा। महाराष्ट्र का सबसे छोटा बाघ अभयारण्य बोर टाइगर रिजर्व अब विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। नई अधिसूचना के अनुसार, 2,328.12 हेक्टेयर क्षेत्र को रिजर्व में जोड़ा जाएगा, जिसमें पांच गांव मेटेझरी, गरमपूर, उमरीझिरी, डेउलघाट और मंदरपुर शामिल हैं। इन गांवों की निजी भूमि, वन क्षेत्र, सड़कें, नदीनाले और चारागाह अब टाइगर रिजर्व के दायरे में आएंगे। इस विस्तार के तहत लगभग 1,122 परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा। प्रत्येक परिवार को 15 लाख रुपये के पैकेज के आधार पर मुआवज़ा देने की योजना है। वर्ष 2020 में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी थी, जबकि 2024 में नए मूल्यांकन के अनुसार 550 करोड़ रुपये का पुनर्वास बजट तय किया गया है।
ग्रामीणों की दशा लंबे समय से दयनीय रही है, जंगली जानवरों के डर से लोग रातों में सो नहीं पाते और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। अब उनके स्थानांतरण से क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष समाप्त होने की उम्मीद है। इस विस्तार के बाद बोर टाइगर रिजर्व को अतिरिक्त 24 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मिलेगा, जिससे यह संरक्षित क्षेत्र और मजबूत होगा। पर्यावरणविदों के अनुसार, यह कदम बाघों के संरक्षण, पर्यटन विकास और स्थानीय समुदायों के पुनर्वास तीनों दृष्टिकोण से ऐतिहासिक साबित होगा।




