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पीड़ित बच्चों का निःशुल्क इलाज

– ‘कैनकिडस्’ संस्था की पहल

नागपुर :-मेडिकल के कैंसर रोग विभाग में आने वाले ‘इविंग सार्कोमा’ (हड्डी का सॉफ्ट टिश्यू कैंसर) से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क इलाज किया जाता है। विभाग से संलग्न ‘कैनकिडस्’ संस्था बच्चों की जांच व उपचार का पूरा खर्च उठाती है। कैंसर रोग विभाग में सालाना 2500 नए मरीज दर्ज होते हैं। इन मरीजों में लगभग 90 बच्चों का समावेश होता है। इनमें से करीब 20 बच्चों में ‘इविंग सार्कोमा’ पाया जाता है। इसका समय पर उपचार नहीं होने पर पैरालिसिस या अन्य तरह की दिव्यांगता का खतरा होता है। पीड़ित बच्चों की आयु 10 से 20 साल तक होती है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को समय पर उपचार मिलने से 2 से 3 साल में स्वस्थ हो जाते हैं।

मेडिकल में आने वाले कैंसर मरीजों में सभी प्रकार के कैंसर पीड़ित होते हैं। इनमें बच्चों का समावेश भी होता है। बच्चों में सर्वाधिक समस्या इविंग सार्कोमा की पाई जाती है। यह कैसर हड्डियों के सॉफ्ट टिश्यू के आसपास होता है। शरीर की मुख्य हड्डियों के साथ किसी भी हड्डी में हो सकता है। इसे नजरअंदाज करने पर शरीर के अन्य हिस्से में भी फैलने का खतरा बना रहता है। इसका फैलाव बोन मेरो, हार्ट, फेफड़े, किडनी, पैर, हाथ, कूल्हे, रीढ़ या खोपड़ी की हड्डी, हाथ, पैर, गर्दन में होने की संभावना बनी रहती है।

ईडब्ल्यूएसआर वन स्वस्थ टिश्यू को करते हैं नष्ट: ‘इविंग सर्कोमा’ होने का मुख्य कारण ज्ञात हो पाना मुश्किल होता है। अब तक यही सामने आया है कि क्रोमोसोमल बदलाव (डीएनए) सेल में क्षति पहुंचाते हैं। इसे ईडब्ल्यूएसआर वन कहते हैं। यह सेल को तेजी से बढ़ाते हैं और स्वस्थ्य टिश्यू को नष्ट कर देते है। इसके लक्षणों में हड्डियों में असह्य दर्द, बुखार, बार-बार फैक्चर होना, थकावट, वजन में कमी, अंगों का सुन्न होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। ट्यूमर की स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट, इमेजिंग टेस्ट, सीटी टेस्ट, एक्स से, एमआरआई, पीईटी-सीटी स्कैन, और रेडियोन्यूक्लाइड बोन स्कैन किया जाता है। डीएलए में बदलाव को समझने जेनेरिक टेस्टिंग में की जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार किया जाता है।

कैंसर संदिग्धता व कोई भी लक्षण दिखने पर जांच करवानी चाहिए। कैनकिड्स के माध्यम से बच्चों के कैंसर का इलाज किया जाता है। मेडिकल का आधुनिक कैंसर इंस्टीट्यूट निर्माण हो रहा है। यहां अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। इससे मध्य भारत के मरीजों को लाभ मिलेगा।

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