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गैस संकट से हिंगना-बुटीबोरी के उद्योगों पर शटडाउन का खतरा

– गैस आपूर्ति ठप, सैकड़ों फैक्ट्रियों में उत्पादन रुकने की आशंका

– सरकारी प्रतिबंध से उद्योगों में हड़कंप, प्लांट बंद करने की चेतावनी

– गैस नहीं तो उत्पादन नहीं: उद्योगों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम  

नागपुर :- औद्योगिक उपयोग के लिए गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके चलते हिंगना और बुटीबोरी एमआईडीसी की सैकड़ों इकाइयों के सामने अब शटडाउन का खतरा खड़ा हो गया है। कई कंपनियों ने राज्य और केंद्र सरकार को अल्टीमेटम दिया है। गैस आपूर्ति तुरंत सुचारू करने की मांग की है। उद्योगों का कहना है कि उत्पादन प्रक्रियाओं में बड़ी मात्रा में एलपीजी, प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग होता है। गैस नहीं मिलने से उत्पादन चक्र बाधित हो रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो कई इकाइयों को अस्थायी रूप से प्लांट बंद करने की नौबत आ सकती है।

वेदांत पेपर क्राफ्ट प्रा. लि. हिंगना एमआईडीसी में उत्पादन इकाई है। कंपनी डिफेंस और विस्फोटक क्षेत्र के लिए कंटेनर और पैकेजिंग सामग्री तैयार करती है। उत्पादन प्रकिया के दौरान कंपनी को बड़ी मात्रा में गैस की जरुरत होती है। पिछले कुछ दिनों से पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही है। कंपनी ने इस संदर्भ में एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन को पत्र लिखकर इस समस्या में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि यदि गैस संकट जारी रहा तो उत्पादन प्रभावित होगा। डिफेंस सेक्टर को होने वाली सप्लाई में भी देरी हो सकती है। अन्य कंपनी वेल्डफास्ट इलेक्ट्रोड ने भी गैस की कमी को लेकर चिंता जताई है। कंपनी को वेल्डिंग इलेक्ट्रोड निर्माण में ड्राइंग ओवन के लिए एलपीजी जरूरत है। मौजूदा समय में उत्पादन के लिए गैस नहीं मिल रही है। इस स्थिति में उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह रुक सकती है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन प्रक्रिया रुक सकती है। प्लांट बंद करने की नैौबत आ सकती है।

गैस संकट का असर केवल इंजीनियरिंग सेक्टर तक सीमित नहीं है। फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक और केमिकल उत्पादन से जुड़ी कई इकाइयों ने भी गैस की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई है। फूड सेक्टर में बेकिंग, रोस्टिंग और विभिन्न प्रोसेसिंग का काम गैस आधारित सिस्टम से किया जाता है। वहीं प्लास्टिक और केमिकल सेक्टर की कंपनियों को भी प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों की कम उपलब्धता से उत्पादन प्रक्रिया प्राभावित होने का डर सता रहा है। इन गैसों का उपयोग रिएक्शन प्रोसेस और तापमान नियंत्रित करने में किया जाता है। हालांकि बड़ी कंपनियों के पास वैकल्पिक व्यवस्था होती है, लेकिन कई छोटी इकाइयां पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं। ऐसे में गैस संकट गहराने पर इन कंपनियों का उत्पादन ठप पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार के इस कदम से रोष

दरअसल, ईरान-इजरायल अमेरिका तनाव के चलते ग्लोबल नेचुरल गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। जिसके चलते सरकार ने कुछ सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नेचुरल गैस आदेश, 2026 जारी किया है। इसके तहत उद्योगों के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सीमित कर दी गई है, ताकि घरेलू बाजार में गैस उपलब्धता बनी रहे। हालांकि उद्योगों का कहना है कि इसी फैसले के कारण उन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिल रही।

रोजगार पर आ सकता है संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर इकाइयां गैस आधारित सिस्टम पर निर्भर हैं। तुरंत वैकल्पिक ईंधन पर शिफ्ट होना आसान नहीं है। मशीनरी में बदलाव के लिए समय और बड़े निवेश की जरूरत होती है। संकट लंबे समय तक बना रहा तो उत्पादन घटने के साथ सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। इसका असर ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फूड और केमिकल जैसे कई सेक्टरों तक पहुंच सकता है। श्रमिकों के रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

कई उद्योग गंभीर संकट में

औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी पर अचानक लगाए गए प्रतिबंध से कई उद्योग गंभीर संकट में आ सकते हैं। हमने सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस फैसले पर पुनर्विचार करने या उद्योगों को वैकल्पिक ईंधन अपनाने के लिए पर्याप्त समय देने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन और रोजगार पर असर न पड़े।


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