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छह महीने से आधिकारिक ट्रेड से नहीं खरीदी शराब; फिर भी दुकानों में हो रही बिक्री नकली शराब का संदेह गहराया

चंद्रपूर :- नियमों के अनुसार शराब विक्रेताओं को केवल अधिकृत ट्रेड से ही शराब खरीदकर बिक्री करना अनिवार्य होता है। लेकिन चंद्रपुर जिले के कई बार अँड रेस्टॉरंट व्यवसायको ने पिछले छह महीनों में ‘आरएस’ कंपनी की एक भी बूंद शराब अधिकृत ट्रेड से नहीं खरीदी है—ऐसा चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है।

इसके बावजूद लगभग सभी दुकानों में आरएस ब्रांड की शराब खुलेआम बिक रही है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि यह शराब आखिर आई कहां से? क्या नकली शराब की आपूर्ति चल रही है? इसी को लेकर कई तरह की शंकाएँ उठने लगी हैं।

सबसे गंभीर बात यह कि इस अनियमितता के कारण राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के राजस्व को कई करोड़ रुपए का नुकसान होने की बात सामने आ रही है।

520 लाइसेंसधारी बार अँड रेस्टॉरंट में से 35 दुकानों ने एक भी बोतल नहीं खरीदी

चंद्रपुर जिले में करीब 520 अधिकृत बार अँड रेस्टॉरंट हैं। नियमों के अनुसार, दुकानों को जरूरी ब्रांड की शराब अधिकृत ट्रेड से खरीदकर खुदरा बिक्री करनी होती है।लेकिन चंद्रपुर की लगभग 35 दुकानों ने मई 2025 से अब तक ‘आरएस’ ब्रांड की एक भी बोतल अधिकृत विक्रेताओं से नहीं खरीदी—फिर भी बार रेस्टॉरंट में आरएस शराब की भरपूर बिक्री हो रही है।इसी वजह से शराब प्रेमियों में चर्चा है कि —

“क्या यह शराब नकली है?”

*एक्साइज विभाग के राजस्व को बड़ा झटका**

राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने पिछले साल जुलाई से शराब के दामों में भारी वृद्धि की है। जीएसटी और शराब बिक्री दोनों से एक्साइज को बड़ा राजस्व मिलता है।

लेकिन जब बार अँड रेस्टॉरंट चालक अधिकृत ट्रेड से शराब खरीद ही नहीं रहे, तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगभग 3 करोड़ रुपए का नुकसान राजस्व विभाग को हुआ है।

नकली शराब और चुनाव — क्या है कनेक्शन*?

अधिकृत ट्रेड से बिक्री नहीं होने के बावजूद सभी बारा रेस्टॉरंट में आरएस की शराब उपलब्ध है। इसी बीच वरोरा और सावली तहसील के पाथरी क्षेत्र में नकली शराब का बड़ा जखीरा पकड़ा गया।इससे यह सवाल उठने लगा है कि —

“क्या चुनाव के मौसम में नकली शराब की सप्लाई बढ़ाई जा रही है?”

चुनाव प्रचार में डुप्लिकेट शराब के इस्तेमाल की आशंका

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रभाव बढ़ाने के लिए नकली और सस्ती शराब का अवैध उपयोग बढ़ सकता है, जिससे यह पूरा मामला और भी संदिग्ध बन रहा है।

आबकारी विभाग कहता है?

राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के अनुसार, शराब की कीमत बढ़ने के कारण बिक्री में कमी आई है। विभाग की टीमें दुकानों में नकली शराब की जांच लगातार कर रही हैं। ऐसी जानकारी राज्य उत्पादन शुल्क विभाग के अधीक्षक नितीन धार्मिक ने दी है!

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