यासीन शेख, गोंदिया अर्जुनी :- मोरगांव तालुका की बहुप्रतीक्षित झाशीनगर उपसा सिंचन योजना, जो पिछले 30 वर्षों से लंबित थी, अब जल्द ही पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वर्ष 1996 में स्वीकृत इस परियोजना का कार्य विभिन्न प्रशासनिक कारणों से अधूरा रह गया था, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा।
मंत्रालय की बैठक में त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मुंबई स्थित मंत्रालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के विधायक राजकुमार बडोले द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों के संदर्भ में चर्चा की गई। इस बैठक में राज्य के जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन ने संबंधित विभागों को परियोजना पर तत्काल कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
झाशीनगर उपसा सिंचन योजना को वर्ष 1996 में मंजूरी मिली थी। वर्ष 2005 में वन विभाग से मुख्य नहर के लिए अनुमति प्राप्त हुई थी। हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान चट्टान आने के कारण लगभग 30 मीटर का कार्य अधूरा रह गया। वन विभाग के अधिकारियों ने इस कार्य को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से नई अनुमति की आवश्यकता बताई। इस पर विधायक बडोले ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि 31 अक्टूबर 2005 को पहले ही अनुमति दी जा चुकी है, ऐसे में नई शर्त लगाना परियोजना में फिर से वर्षों की देरी करना होगा।
मंत्री गिरीश महाजन ने वन विभाग को सकारात्मक भूमिका अपनाते हुए शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश दिए। साथ ही रामपुरी, तिडका और झाशीनगर के लघु नहरों के पीडीएन पद्धति से कार्यों को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। इन कार्यों को विधि एवं न्याय विभाग के मार्गदर्शन में तुरंत शुरू करने के आदेश भी दिए गए हैं।
किसानों की उम्मीदें फिर जगीं
तीन दशकों से लंबित इस परियोजना के कारण क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सिंचाई के अभाव में कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ और अधिकांश किसान वर्षा पर निर्भर रहे। मंत्रालय में हुई इस बैठक के बाद किसानों में नई आशा जगी है कि झाशीनगर उपसा सिंचन योजना शीघ्र पूरी होगी और उन्हें सिंचाई का लाभ मिलेगा।
बैठक में झाशीनगर गांव के इटियाडोह परियोजना के कारण लगभग 50 वर्ष पूर्व हुए विस्थापन तथा अब तक गांव और बांध के पुनर्वास एवं निर्विणीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। राजस्व एवं वन विभाग से संतोषजनक जानकारी न मिलने पर मंत्री महाजन ने संबंधित विभागों को दस दिनों के भीतर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए।
अब पूरे तालुका की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या तीन दशक लंबी प्रतीक्षा वास्तव में समाप्त होगी और किसानों को उनका हक मिल पाएगा।