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लाडली बहना स्कीम में करोड़ों का घोटाला उजागर

– 12,415 सरकारी कर्मचारियों ने उठाया अवैध लाभ, वसूली शुरू

 मुंबई :- राज्य सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी और बहुचर्चित ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण’ (मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन) योजना इस समय बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के कारण विवादों में घिर गई है। इस योजना में हजारों अपात्र लोगों द्वारा सेंध लगाने की चौंकाने वाली बात खुद सरकार ने विधानसभा में कबूल की है। विपक्ष द्वारा इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर शुरुआत से ही गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन अब सरकार के लिखित जवाब ने उन सभी आरोपों पर आधिकारिक मुहर लगा दी है, जिससे प्रशासनिक मुस्तैदी की कलई खुल गई है।

आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई इस योजना को किसी और ने नहीं, बल्कि खुद सरकारी कर्मचारियों ने ही चूना लगाया है। सरकारी जांच और सत्यापन के दौरान यह बात सामने आई है कि कुल 12 हजार 415 शासकीय कर्मचारी इस योजना का अवैध रूप से लाभ ले रहे थे। सरकारी सेवा में तैनात और नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारी इस योजना के लिए पूरी तरह अपात्र थे, इसके बावजूद उन्होंने आवेदन कर सरकारी खजाने से पैसे बटोरे।

इस घोटाले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती; केवल महिलाओं के लिए आरक्षित इस योजना का लाभ कुछ पुरुष लाभार्थियों ने भी उठा लिया, जिसने व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सभी अपात्र लाभार्थियों ने मिलकर सरकार को करीब 165 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। मामला उजागर होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अब सरकार ने तुरंत कड़े कदम उठाते हुए इस 165 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत वसूली करने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को जारी कर दिए हैं।

योजना में सामने आई इस बड़ी लापरवाही के बाद अब पूरे राज्य में लाभार्थियों के दस्तावेजों की दोबारा और बेहद कड़ाई से जांच की जा रही है। जिन लाभार्थियों ने अभी तक अपनी अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी, उनका अनुदान सरकार ने तुरंत प्रभाव से रोक दिया है। प्रशासन का कहना है कि योजना का लाभ केवल और केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं तक ही पहुंचे, इसके लिए अब तकनीकी और जमीनी स्तर पर छानबीन की प्रक्रिया को काफी सख्त कर दिया गया है।

अपात्र लाभार्थियों ने लगाया 165 करोड़ का चूना

लाडली बहन योजना को महायुति सरकार का ‘गेमचेंजर’ और सबसे बड़ा जनहितकारी प्रोजेक्ट माना जा रहा था। ऐसे में हजारों सरकारी कर्मचारियों और पुरुषों द्वारा योजना का लाभ लेने की बात आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस 165 करोड़ रुपये की वसूली कितनी तत्परता से करता है और अपात्र आवेदन पास करने वाले दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार की घेराबंदी करने के लिए पूरी तरह आक्रामक मूड में है।

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