चंद्रपुर :- चंद्रपुर महानगरपालिका की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी? यह सवाल अब किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म जैसा हो गया है। स्पष्ट बहुमत के अभाव में शहर की राजनीति में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ और ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ का ऐसा खेल शुरू हुआ है, जिसने नैतिकता को हाशिए पर धकेल दिया है। गलियारों में चर्चा है कि एक-एक वोट की कीमत एक करोड़ रुपये तक लग चुकी है?
सत्ता का समीकरण: आंकड़ों की उलझन
कुल सीटों के गणित में कोई भी दल जादुई आंकड़े को अकेले छूने में नाकाम रहा है। वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:
कांग्रेस: 27 | भाजपा: 23 | शिवसेना (UBT): 06
अन्य: जनविकास सेना (03), वंचित (02), शिंदे गुट (01), AIMIM (01), BSP (01) और निर्दलीय (02)।
बहुमत के लिए जोड़-तोड़ की इस जंग में निर्दलीय और छोटे दल अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं।
बिकने को तैयार ‘ईमान’? पार्षदों को करोड़ों का ऑफर!
सियासी गलियारों में तब हड़कंप मच गया जब कुछ नवनिर्वाचित पार्षदों ने सनसनीखेज दावा किया कि उन्हें पाला बदलने के लिए ₹1 करोड़ की भारी-भरकम पेशकश की जा रही है। इस ‘ऑफर’ ने कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों की नींद उड़ा दी है। डर इस बात का है कि कहीं लक्ष्मी के प्रलोभन में निष्ठा न डगमगा जाए।
अपनों से ही डर: पर्यटन के नाम पर ‘नजरबंदी’
बगावत और दगाबाजी से बचने के लिए पार्टियों ने ‘टूरिज्म डिप्लोमेसी’ का सहारा लिया है।
कांग्रेस का बिखराव: सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस दो फाड़ नजर आ रही है। सांसद प्रतिभा धानोरकर और विधायक विजय वडेट्टीवार के समर्थक पार्षद अलग-अलग गुटों में बंटकर ‘अज्ञात’ सैरगाहों पर भेज दिए गए हैं।
भाजपा की घेराबंदी: भाजपा ने भी रिस्क नहीं लिया है। 23 में से कुछ पार्षदों को नागपुर के एक आलीशान होटल में ‘सुरक्षित’ रखा गया है, तो कुछ को बाहर रवाना कर दिया गया है।
जनविकास सेना पर टिकी निगाहें
पप्पू देशमुख की जनविकास सेना (03 सीटें) इस खेल में महत्वपूर्ण मोहरा बनकर उभरी है। हालांकि उनका झुकाव कांग्रेस की ओर दिख रहा है, लेकिन राजनीति में ‘संभावनाओं के द्वार’ कभी बंद नहीं होते।