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मेयो के वरिष्ठ डॉक्टर से 2 करोड़ की मांग : हनी ट्रैप रैकेट की महिला यूट्यूबर गिरफ्तार

– हनी ट्रैप गैंग का पर्दाफाश: यूट्यूबर किरण मेश्राम पकड़ी गई, गिरफ्तारियां 9 पहुंचीं

नागपुर :- मेयो के वरिष्ठ चिकित्सक को हनी ट्रैप में ब्लैकमेल करके दो करोड़ का हफ्ता मांगनेवाले रैकेट की सदस्य महिला यूट्यूबर किरण मेश्राम को तहसील पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इसके साथ ही प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 9 हो गई है. इस रैकेट ने 62 वर्षीय वरिष्ठ चिकित्सक को हनी ट्रैप के जाल में फंसाकर 2 करोड़ रुपए मांगे थे. समय-समय पर 1.78 लाख रुपए लिए थे. बाद में 60 लाख रुपए लेकर प्रकरण खत्म करने के लिए तैयार हो गए थे. नियमित धमकाए जाने से त्रस्त होकर चिकित्सक ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की और विनोद धनविजय, नितिन सुखदेव कांबले, कुणाल प्रकाश पुरी, रितेश मनोहर दुरुगकर, आशीष मधुकर कांबले और आशीष हेमराज साखरे को गिरफ्तार किया था.

बाद में आरुषि काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. क्राइम ब्रांच ने 18 दिसंबर को योजना बनाकर यूट्यूबर रविकांत कांबले, उसके साथी अश्विन भालाधरे नामक महिला को गोंदिया से गिरफ्तार किया गया, सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए हैं. पुलिस को जांच में यूट्यूबर किरण मेश्राम के भी लिप्त होने का पता चला. वारदात के बाद से वह भूमिगत हो गई थी. आज पुलिस के हाथ लग गई. इस प्रकरण में 13 आरोपियों को नामजद किया गया है. इनकी अपराध में सीधे तौर पर लिप्तता है. उन्हें पांच से छह साथियों ने पर्दे के पीछे से मदद की है. यह आरोपियों को शिकार की जानकारी देते थे. इसके बाद आरोपी शिकार को फांसने में जुट जाते थे. अबतक की जांच से यूट्यूबर रविकांत कांबले की प्रकरण में अहम भूमिका होने का पता चला है. वह अपने भरोसेमंद साथियों पुलिस इस रैकेट के आर्थिक लेन देन और डिजिटल साक्ष्यों की भी बारीकी से जांच कर रही है. मोबाइल, बैंक खातों और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाला जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और कुछ बड़े नाम भी सामने आने की संभावना है. मदद से उगाही को अंजाम दे रहा था. इस तरह के अपराध का पुराना खिलाड़ी होने से उसे धमकाने के हथकंडे पता था. शीत सत्र के दौरान कांबले विधान भवन परिसर में मंडराता था. इस दौरान भी वह चिकित्सक को धमकाने में जुटा था. इस रैकेट में सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मी भी शामिल है. गहराई से जांच किए जाने पर उनके नाम सामने आ सकते हैं. पुलिस की अपील के बाद भी बदनामी के भय से कई पीड़ित सामने नहीं आ रहे हैं. इसके बावजूद पुलिस आरोपियों के खिलाफ मकोका अथवा दूसरी सख्त प्रतिबंधक कार्रवाई करने पर विचार कर रही है, तहसील पुलिस फरार आरोपियों को तलाश रही है.


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