– नोटिस पर नोटिस, कार्रवाई शून्य
– एयरपोर्ट के 20 किमी दायरे में नियमों की अनदेखी
नागपुर :- एयरपोर्ट के आसपास विमान सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है। 8 वर्षों में निर्धारित ऊंचाई का उल्लंघन करने वाली इमारतों की संख्या 10 से बढ़कर 185 पहुंच गई है। इनमे 64 इमारतें गंभीर श्रेणी में हैं। अब तक एक भी भवन के अवैध हिस्से पर कार्रवाई नहीं हुई है। नोटिस जारी होते रहे, फाइलें चलती रहीं, मगर बुलडोजर नहीं चला। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब नागपुर एयरपोर्ट को देश के प्रमुख मल्टी-रनवे एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। एयरपोर्ट का संचालन संभाल रही जीएमआर समूह भविष्य में बड़े विमानों की आवाजाही बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
20 किमी दायरे में एनओसी जरूरी : एयरपोर्ट के आसपास 20 किमी के दायरे में कोई भी भवन बनाने से पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से एनओसी लेना अनिवार्य है। ऑनलाइन सिस्टम के जरिए हर जगह के लिए अधिकतम ऊंचाई तय की जाती है। आरोप है कि कई बिल्डरों ने एनओसी मिलने के बाद तय सीमा से ज्यादा निर्माण कर लिया। इससे निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। एयरक्राफ्ट नियम, 1994 के तहत तय ऊंचाई से अधिक बने हिस्से को हटाने का प्रावधान है। इसके बावजूद 2018 से अब तक किसी भी भवन पर कार्रवाई नहीं हुई। मिहान इंडिया लिमिटेड और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मनपा को कई बार कार्रवाई के लिए पत्र लिखे। बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पायलट की बढ़ती हैं मुश्किलें : विमानन विशेषज्ञों के अनुसार टेक ऑफ और लैंडिंग के समय उड़ान मार्ग में आने वाली ऊंची इमारतें बड़ा खतरा बन सकती हैं। ऐसे अवरोध मिलने पर कॉकपिट में ग्राउंड प्रॉक्सिमिटी वार्निंग सिस्टम सक्रिय हो जाता है।
मल्टी-रनवे हब बनने से पहले सुरक्षा पर सवाल
इससे उड़ान संचालन अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चिंचभवन के पास एक रिहायशी परियोजना में चार टावर तय सीमा से तीन मंजिल ज्यादा बनाए गए थे। इस मामले में नोटिस जारी होने के बाद विवाद अदालत तक पहुंचा। इसी बीच नई ऑब्सटेकल लिमिटेशन सरफेस (ओएलएस) रिपोर्ट भी जल्द आने की चर्चा है।




