– छह शहरों में छापेमारी
मुंबई :- महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में एक बड़ा बैंक गारंटी घोटाला सामने आया है। राज्य सरकार की ‘सौर कृषि ऊर्जा चैनल 2.0’ योजना के तहत 122.85 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा किए जाने का मामला उजागर हुआ है, जिससे सरकार और महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) को बड़ा वित्तीय झटका लगा है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुछ कंपनियों ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी दस्तावेज जमा किए। योजना के तहत सौर ऊर्जा प्रकल्प स्थापित करने और बिजली खरीद समझौता (PPA) करने से पहले ठेकेदार कंपनियों के लिए बैंक गारंटी देना अनिवार्य है। जानकारी के अनुसार, निर्धारित समय सीमा में परियोजनाएं पूरी न होने पर महावितरण ने संबंधित बैंकों को गारंटी भुगतान के लिए दस्तावेज भेजे। इस दौरान बैंकों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत की गई बैंक गारंटी उनके द्वारा जारी नहीं की गई थीं। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
इस प्रकरण में मेसर्स नाकॉफ एनर्जी, एनओपीएल प्रोजेक्ट्स, इंटीग्रेशन इंडक्शन पावर लिमिटेड (आईआईपीएल), ओनिक्स रिन्यूएबल और ओनिक्स आईपीपी सहित कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन कंपनियों द्वारा अलग-अलग परियोजनाओं के लिए कुल 122.85 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा की गई।
20 फरवरी को मामला दर्ज किए जाने के बाद 21 फरवरी 2026 को पुलिस ने मुंबई सहित नई दिल्ली, इंदौर, अहमदाबाद और राजकोट समेत छह स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं और पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
इस बीच, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता अंबादास दानवे ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना में हजारों करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला हुआ है। दानवे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या फर्जी बैंक गारंटी के जरिए ठेके हासिल करने में कुछ अधिकारियों और कंपनियों के निदेशकों की मिलीभगत थी।
दानवे ने अपने पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में इस मामले से जुड़े पांच प्रकरण दर्ज किए गए हैं। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों से रकम की वसूली की जाए।
फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच के बाद ही घोटाले की पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।