– मंत्री आशीष जायसवाल की चेतावनी, जलसंकट से निपटने की तैयारी शुरू
नागपुर :- विदर्भ में आगामी महीनों के दौरान गंभीर जलसंकट की आशंका के बीच कृषि राज्यमंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि पेंच परियोजना में पिछले पांच वर्षों से आपातकाल के लिए बचाकर रखा गया पानी अब मौजूदा मांग पूरी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले वर्ष भी बारिश की अनिश्चितता के कारण सितंबर तक जलसंकट बना रह सकता है। इससे निपटने के लिए प्रशासन ने हर गांव में पानी के टैंकर उपलब्ध कराने, बोरवेल की मरम्मत और अस्थायी चेकडैम बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
पारशिवनी में जलसंकट की समीक्षा बैठक के दौरान जायसवाल ने कहा कि हर साल पानी बचाकर रखने का निर्णय अब महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। पिछले पांच वर्षों में संरक्षित किया गया पानी ही वर्तमान में उपयोग किया जा रहा है और नहरों में छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जून में बारिश होगी ही, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में अगले वर्ष भी स्थिति कठिन हो सकती है और पानी की कमी सितंबर तक जारी रहने की आशंका है।

पेंच परियोजना से चरणबद्ध तरीके से मिलेगा पानी
रामटेक क्षेत्र के विधायक जायसवाल ने कहा कि इस बार सुपर अल नीनो और अक्टूबर में भी तापमान अधिक रहने से जलसंकट की स्थिति गंभीर हुई है। उनके अनुसार, इससे सर्दी का मौसम छोटा और गर्मी अधिक तीव्र होने की आशंका है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि जरूरत के अनुसार पेंच परियोजना से चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि लिफ्ट सिंचाई योजना और 486 करोड़ रुपये की लागत से खिंडसी नहर का निर्माण किया गया है। इसके अलावा कन्हान और कांड्री जलापूर्ति योजनाओं के लिए नदी में भी पानी छोड़ना आवश्यक होगा। इस कारण उपलब्ध जल का उपयोग विभिन्न जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
हर गांव में टैंकर, मोटर पंप और पाइप की व्यवस्था
मंत्री ने कहा कि प्रत्येक गांव को 5,000 लीटर क्षमता वाला पानी का टैंकर, मोटर पंप और पाइप उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए विधायक स्थानीय विकास निधि और जिला नियोजन समिति के फंड से राशि निर्धारित की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निजी टैंकरों, ट्रकों और अन्य भारी मशीनरी की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जिला या तहसील स्तर पर निविदा प्रक्रिया के माध्यम से टैंकरों की दरें पहले से तय की जाएंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी की आपूर्ति शुरू की जा सके। इसके साथ ही जिले की सभी 13 तहसीलों में बोरवेल मरम्मत दल तैयार रखने को कहा गया है। जलसंकट कम करने के लिए वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) और महानिर्मिति (महाजेनको) की खदानों में उपलब्ध पानी के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
1,000 अस्थायी चेकडैम बनाने की योजना:
जलसंकट से निपटने के लिए राहत योजना के दूसरे प्रमुख हिस्से के तहत 1,000 तिरपाल आधारित अस्थायी चेकडैम बनाने की योजना है। जायसवाल ने बताया कि इनसे बारिश के पानी का बहाव धीमा करने और पानी को एकत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए तिरपाल उपलब्ध कराने सहित अन्य जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। यदि ग्रामीण इसमें योगदान देना चाहें, तो ग्राम पंचायत की सहमति से काम किया जा सकेगा।








