नागपुर :- गर्त में समा चुकी सिटी की ट्रैफिकव्यवस्था के जख्म को ट्रैफिक पुलिस ने प्राइवेट और ट्रैवल्स बसों को शहर के भीतर स्टॉपेज की अधिसूचना को एक वर्ष के लिए बढ़ाकर एक बार फिर कुरेद दिया है. हैरानी की बात यह है कि पिछले वर्ष के लगभग अंतिम महीने तक जारी इस अधिसूचना के बाद भी हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि तारीख बदल गई लेकिन व्यवस्था नहीं. सवाल ये है कि आखिर इस आदेश के बाद बदलाव क्या दिखा जो इसे दोबारा लागू कर कर दिया गया. वह भी सीधे एक वर्ष के लिए. नये आदेश में बसों के लिए तय स्टॉप और समय निर्धारित किए गए हैं, ताकि शहर में ट्रैफिक सुचारु रहे लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है. वर्धा रोड, अमरावती रोड, मानकापुर, छत्रपति चौक जैसे प्रमुख मार्गों पर बसें आज भी मनमाने तरीके से रुकती दिखती हैं. ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा जिससे साफ है कि सख्ती सिर्फ कागजों तक सीमित है.
इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है. ऑफिस जाने वाले कर्मचारी घंटों जाम में फंसते हैं, विद्यार्थियों की बसें लेट होती हैं और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाएं भी प्रभावित होती हैं. शहर की यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे अव्यवस्था का पर्याय बनती जा रही है. स्पष्ट है कि केवल अधिसूचना जारी करना समाधान नहीं है. जब तक नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार विभाग जवाबदेही नहीं निभाएंगे तब तक ऐसे आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे.








