– हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक जारी रहेंगे बिक्री और विसर्जन के नियम
नागपुर :- प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों की बिक्री और विसर्जन को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने नियमों को आगे बढ़ा दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक लागू रहने वाले इन नियमों के तहत अब पीओपी से बनी प्रत्येक मूर्ति की पीठ पर लाल रंग का स्पष्ट गोल निशान लगाना अनिवार्य होगा। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इस संबंध में नया सर्कुलर जारी किया है।
इससे पहले अगस्त 2025 में जारी किये गये नियम 31 मार्च 2026 तक लागू थे। हालांकि, पीओपी मूर्तियों से संबंधित जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को देखते हुए सरकार ने इन नियमों को आगे बढ़ाया है।

बिक्री और विसर्जन के प्रमुख नियम
लाल निशान जरूरी : पीओपी से बनी प्रत्येक मूर्ति की पीठ पर लाल रंग का स्पष्ट गोलाकार निशान लगाना अनिवार्य होगा।
अलग रजिस्टर रखना होगा : मूर्ति विक्रेताओं को पीओपी मूर्तियों की बिक्री का अलग रजिस्टर रखना होगा।
ग्राहकों को देनी होगी जानकारी : दुकानदारों को मूर्ति खरीदने वाले ग्राहकों को विसर्जन संबंधी नियमों की जानकारी वाली पर्ची देना अनिवार्य होगा।
6 फीट से छोटी मूर्तियां : घरों में स्थापित होने वाली या छह फीट से कम ऊंचाई वाली पीओपी मूर्तियों का विसर्जन केवल कृत्रिम तालाबों में किया जा सकेगा।
बड़ी मूर्तियों के लिए सशर्त अनुमति : छह फीट से अधिक ऊंची पीओपी मूर्तियों का प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन केवल ऐसी स्थिति में किया जा सकेगा, जब कोई अन्य विकल्प उपलब्ध न हो। ऐसे मामलों में प्रशासन को अगले दिन पानी से पीओपी सामग्री बाहर निकालनी होगी।
प्रतीकात्मक मूर्ति का विकल्प : बड़े गणेश मंडलों को मुख्य मूर्ति को सुरक्षित रखते हुए विसर्जन के लिए छोटी प्रतीकात्मक मूर्ति का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
विसर्जन के बाद उपचार : कृत्रिम तालाबों के पानी का सात दिनों के भीतर उपचार करना होगा। वहीं, तलछट और बची हुई मिट्टी को 15 दिनों तक सुरक्षित रखकर उसके रीसाइक्लिंग की व्यवस्था करनी होगी।
मनपा के सामने नियम लागू करने की चुनौती :
सरकार के नियमों के बावजूद नागपुर के बाजारों में बिना लाल निशान वाली पीओपी मूर्तियों की बिक्री जारी रहने से नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मनपा के सामने बाजारों में बिक रही मूर्तियों की जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है।
गणेशोत्सव के दौरान विसर्जन व्यवस्था के लिए मनपा इस वर्ष शहरभर में 400 से अधिक कृत्रिम विसर्जन टैंक स्थापित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही पंजीकृत गणेश मंडलों की मूर्तियों की जानकारी जुटाकर उसी के अनुरूप विसर्जन व्यवस्था की जा रही है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) और स्थानीय निकायों को पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अब देखना होगा कि बाजारों में पीओपी मूर्तियों पर लाल निशान लगाने सहित अन्य नियमों का पालन किस हद तक सुनिश्चित हो पाता है।





