– नागपुर जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर बड़ा सवाल — ट्रक पकड़ा गया, फिर रात में छोड़ दिया गया? जनता पूछ रही जवाब
नागपुर / सावनेर :- नागपुर जिले की सावनेर तहसील इन दिनों अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र में बिना नंबर प्लेट के ओवरलोड रेत से भरे ट्रक खुलेआम सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत माफिया इस कदर बेखौफ हो चुके हैं कि उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है। सावनेर क्षेत्र में “एक रॉयल्टी – कई ट्रिप” का खेल चलने की चर्चा जोर पकड़ रही है।चर्चा चल रही है कि एक ही रॉयल्टी के आधार पर कई बार रेत की ढुलाई की जा रही है और रेत सावनेर व आसपास के क्षेत्रों में खाली की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक सावनेर के रेत घाट करोड़ों रुपये में लिलाव किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगती नजर नहीं आ रही। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक रेत घाट संचालक के यहां जीएसटी विभाग की रेड भी हुई थी। हालांकि यह कार्रवाई किस कारण से हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है,लेकिन चर्चा है कि जांच और गहराई तक जा सकती है।
ट्रक पकड़ा गया… फिर क्यों छोड़ दिया गया?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 17 फरवरी 2026 की रात करीब 7 से 10 बजे के बीच गश्त कर रहे एक नायब तहसीलदार ने रेत से भरे एक ट्रक को पकड़कर सावनेर तहसील कार्यालय में खड़ा कराया। चर्चा है कि ट्रक तहसील कार्यालय पहुंचने के बाद किसी वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया और ट्रक को छोड़ने के निर्देश दिए गए। बताया जा रहा है कि कथित दबाव के चलते नायब तहसीलदार को ट्रक छोड़ना पड़ा। हालांकि इस पूरे मामले की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जनता के बीच उठ रहे बड़े सवाल
इस घटना के बाद सावनेर की जनता के बीच कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं—
यदि ट्रक के पास वैध रॉयल्टी थी तो उसे तहसील कार्यालय क्यों लाया गया?
यदि ट्रक में करीब 500 फुट रेत का ओवरलोड माल भरा था, तो इसकी जानकारी आरटीओ को क्यों नहीं दी गई?
क्या इस ट्रक का कोई पंचनामा या आधिकारिक अहवाल तैयार किया गया?
ट्रक को रात के अंधेरे में क्यों छोड़ा गया?
इन सवालों के चलते सावनेर तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर संदेह गहराता जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पकड़ा गया ट्रक काटोल क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता के करीबी व्यक्ति का बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि उसकी वरिष्ठ अधिकारियों से नजदीकी के चलते ही ट्रक को छोड़ने के निर्देश दिए गए।
कलमेश्वर में भी पकड़ा गया था ट्रक
सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले कलमेश्वर क्षेत्र में भी अवैध रेत परिवहन करते हुए एक ट्रक पकड़ा गया था। इससे यह संकेत मिलते हैं कि जिले में कई स्थानों पर अवैध रेत परिवहन का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
महसूल मंत्री के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
राज्य के महसूल मंत्री द्वारा अवैध रेत उत्खनन पर सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जिस रेत घाट से अवैध रूप से रेत भरकर ट्रक लाए जा रहे हैं, उन घाटों पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही — यह सवाल भी लगातार उठ रहा है।
यदि किसी घाट से अवैध रेत भरकर ट्रक निकल रहे हैं तो संबंधित घाट संचालकों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर घाट सील करने की मांग भी स्थानीय लोगों द्वारा उठाई जा रही है।
प्रशासन की सख्ती पर सवाल
जिले में रेत घाटों की निगरानी के लिए नियम, तकनीक और प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है, फिर भी अवैध उत्खनन और परिवहन जारी रहने से लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी गतिविधि प्रशासन की नजर से कैसे बच रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अधिकारियों की मिलीभगत नहीं हो तो इस तरह का अवैध कारोबार चल ही नहीं सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रहा अवैध रेत उत्खनन नदी के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। इससे नदी का पात्र गहरा होता जाएगा और भविष्य में जलस्तर और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। अब सावनेर की जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। तहसील कार्यालय के CCTV फुटेज की जांच की जाए और यदि किसी अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। रेत माफिया का यह नेटवर्क न केवल प्रशासन की साख पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है।