– 51 प्रतिशत से कम मिले छात्र तो होगी कार्रवाई
पुणे :- अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों में कुल प्रवेशित विद्यार्थियों में कम से कम 51 प्रतिशत छात्र संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय से हैं या नहीं, इसकी जांच करने का आदेश विभागीय शिक्षा उपनिदेशक डॉ. गणपत मोरे ने दिया है. उन स्कूलों पर कार्रवाई के लिए भी निर्देश दिए गए हैं, जो इस मानदंड को पूरा नहीं कर रहे हैं और इसके संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है. पुणे शहर में पिछले चार-पांच वर्षों में कई स्कूलों ने शिक्षा हक कानून के तहत 25 प्रतिशत प्रवेश की शर्त से पाने के लिए भाषाई अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त किया है. लेकिन वास्तविक प्रवेशित छात्रों की संख्या देखने पर संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों का अनुपात बहुत कम पाया गया है. शासन के मौजूदा नियमों के अनुसार, अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों में कुल छात्रों का कम से कम 51 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय का होना अनिवार्य है. कई स्कूलों में इस मानदंड की पूर्ति न होने का आरोप महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के पुणे शहराध्यक्ष धनंजय दलवी ने लगाया है. उन्होंने पिछले तीन वर्षों की प्रवेश प्रक्रिया, 51 प्रतिशत मानदंड की पूर्ति, और अन्य सरकारी नियमों के पालन की सख्त जांच की मांग की. शिक्षा उपनिदेशक ने जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों और पुणे मनपा के अधिकारियों को आदेश दिया है कि सभी अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें. धनंजय दलवी ने कहा कि अल्पसंख्यक दर्जे का दुरुपयोग न हो, स्कूल स्थापित करने का मूल उद्देश्य बनाए रखा जाए, और गरीब व जरूरतमंद छात्र शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहें. जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले स्कूलों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. इस बीच, आरटीई के तहत छात्र नामांकन की प्रक्रिया जारी है. ऑनलाइन आवेदन भरने की अंतिम तिथि 10 मार्च निर्धारित की गई है. आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, जिसके अनुसार छात्र के निवास से एक किलोमीटर की दूरी में ही स्कूल चयन के लिए उपलब्ध होंगे. हालांकि, संगठनों का कहना है कि यह बदलाव सही नहीं है.