– विद्यार्थियों की सेहत से खिलवाड़, प्रशासन की लापरवाही उजागर
– भोजन में कीड़े, लार्वा और सेफ्टी पिन, पौष्टिक आहार के नियमों की उड़ाई धज्जियाँ, सामाजिक न्याय विभाग कटघरे में
नागपुर :- सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत संचालित पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के शासकीय छात्रावासों में घटिया, बासी और अस्वच्छ भोजन दिए जाने के मामले सामने आए हैं। इस संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका भीम आर्मी सामाजिक संगठन के सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत मिलिंद बानसोड ने दाखिल की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को पहले ही नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में कहा गया है कि छात्रावासों में दिया जा रहा भोजन विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। याचिका के अनुसार नागपुर विभाग के लगभग 25 छात्रावासों और दो शासकीय आवासीय स्कूलों में भोजन आपूर्ति का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया है। इसके बावजूद कई छात्रावासों में भोजन में कीड़े, लार्वा और सेफ्टी पिन मिलने, बासी चिकन परोसने तथा मिलावटी और पतला दूध देने की शिकायतें सामने आई हैं।
याचिका में बताया गया है कि 7 अक्टूबर 2024 को वसंत नगर स्थित छात्रावास में भोजन में कीड़े पाए गए थे। वहीं 9 फरवरी 2024 को बासी भोजन के कारण विद्यार्थियों को पेट दर्द हुआ और खाद्य विषाक्तता की आशंका जताई गई थी, जिसकी शिकायत छात्रावास अधीक्षक ने की थी। सरकार के 6 नवंबर 2023 के शासन निर्णय के अनुसार विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन, नाश्ता, फल, दो अंडे, सप्ताह में दो बार मांसाहार और 200 मिली टेट्रा पैक दूध देना अनिवार्य है।याचिका के अनुसार नागपुर विभाग के लगभग 25 शासकीय छात्रावासों और दो शासकीय आवासीय विद्यालयों में भोजन आपूर्ति का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया है। इसके बावजूद कई छात्रावासों में भोजन में कीड़े, लार्वा, सेफ्टी पिन मिलने, बासी चिकन परोसे जाने और मिलावटी व पतला दूध दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
याचिका में बताया गया है कि 7 अक्टूबर 2024 को वसंत नगर स्थित छात्रावास में विद्यार्थियों के भोजन में कीड़े पाए गए थे। वहीं 9 फरवरी 2024 को बासी भोजन के सेवन से कई विद्यार्थियों को पेट दर्द की शिकायत हुई थी और खाद्य विषाक्तता की आशंका जताई गई थी, जिसकी लिखित शिकायत छात्रावास अधीक्षक द्वारा की गई थी।
सरकार द्वारा 6 नवंबर 2023 को जारी शासन निर्णय के अनुसार विद्यार्थियों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन, नाश्ता, फल, दो अंडे, सप्ताह में दो बार मांसाहार तथा 200 मिली टेट्रा पैक दूध देना अनिवार्य है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन नियमों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। इसके साथ ही आहार विशेषज्ञ की नियुक्ति, भोजन तालिका का प्रदर्शन और भोजन जांच समिति का गठन भी नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विद्यार्थियों और छात्रावास अधीक्षकों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आती है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई आगामी दिनों में होने की संभावना है। अब सभी की नजरें अदालत के रुख और राज्य सरकार की जवाबदेही पर टिकी हुई हैं, ताकि छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।
छात्रावासों की बदहाली पर अदालत सख्त
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन नियमों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। साथ ही आहार विशेषज्ञ की नियुक्ति, भोजन तालिका का प्रदर्शन और भोजन जांच समिति का गठन भी नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विद्यार्थियों और छात्रावास अधीक्षकों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे प्रशासन की लापरवाही सामने आती हैं।