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तहसील कार्यालय में गंदगी का साम्राज्य

– मोदी के स्वच्छता अभियान की धज्जियाँ, कुही तहसीलदार पर उठे सवाल

– मोदी के स्वच्छता अभियान की अनदेखी, कुही तहसीलदार अमित घाटगे की लापरवाही

– दीवारें गुटखे से रंगी, जगह-जगह कचरे का साम्राज्य

उल्हास मेश्राम साळवा विशेष प्रतिनिधी :- राज्य सरकार ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक “स्वच्छता ही सेवा” अभियान चलाने का निर्णय लिया है। लेकिन कुही तहसील कार्यालय में इस अभियान की पूरी तरह धज्जियाँ उड़ती नज़र आ रही हैं।

कुही तहसील कार्यालय की पहली मंजिल पर कुल छह विभाग कार्यरत हैं—

होमगार्ड पथक कुही कार्यालय

मंडल अधिकारी कक्ष

अन्न, नागरी एवं ग्राहक संरक्षण विभाग

भूमि अभिलेख विभाग कार्यालय कुही

वन परिक्षेत्र अधिकारी (सामाजिक वनीकरण विभाग कुही)

तालुका कृषि अधिकारी कार्यालय

इनमें से कृषि अधिकारी कार्यालय का परिसर अपेक्षाकृत साफ दिखाई दिया। लेकिन शेष कार्यालयों तथा सीढ़ियों के आस-पास गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। जगह-जगह कचरा बिखरा पड़ा है, वहीं आधार नोंदणी कक्ष के बाहर भी यही दृश्य है।

तलाठी और मंडल अधिकारी कार्यालय के सामने खुले परिसर में पुरानी प्लास्टिक की बोतलें, गुटखा खाकर थूकी गई पान की पीक से पीली दीवारें बदहाल स्थिति का चित्र प्रस्तुत करती हैं। तहसील कार्यालय के पीछे के हिस्से में भी कर्मचारी खिड़कियों से फल के छिलके और अन्य गंदगी फेंकते हैं, जो अब तक साफ नहीं की गई है। इससे साफ ज़ाहिर होता है कि तहसील प्रशासन खुद अपने ही कार्यालय की स्वच्छता को लेकर गंभीर नहीं है।

राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती (2 अक्टूबर) तक “स्वच्छता ही सेवा” अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अवधि में अस्वच्छ स्थानों की सफाई, सार्वजनिक जगहों पर सफाई मित्र सुरक्षा शिविर, हरित महोत्सव, स्वच्छता का आग्रह और “एक दिन, एक साथ, एक घंटा श्रमदान” जैसे उपक्रम आयोजित करने के आदेश दिए गए हैं।

तहसीलदार अमित घाटगे ने भी पूरे तालुके में पखवाड़ा मनाने का निर्देश जारी किया था। लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी न केवल तहसील कार्यालय में गंदगी जस की तस है, बल्कि प्रशासन ने खुद अपने ही परिसर की ओर आंखें मूँद ली हैं।

जैसा कि जनमानस कहता है— “लोगों को उपदेश देने वाले स्वयं ही उपेक्षा में डूबे हैं।” यही स्थिति कुही तहसील कार्यालय की है।

प्रतिक्रिया 1

प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिवस (17 सितंबर) से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती (2 अक्टूबर) तक सेवा पखवाड़ा चलाया जा रहा है। मैंने अपने कर्मचारियों को तहसील कार्यालय पूर्णत: स्वच्छ रखने के निर्देश दिए हैं।

— अमित घाटगे, तहसीलदार कुही

प्रतिक्रिया 2

“इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय में गंदगी, दीवारों पर गुटखे की पिचकारी और शौचालयों की बदहाली बेहद शर्मनाक है। यह न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है बल्कि क़ानूनन भी गलत है।”

— आनंद खडसे,उमरेड

विधानसभा संगठन एवं पूर्व जि.प. सदस्य


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