– क्या करोड़ों की नीलामी के बाद शुरू हुई लूट की खुली छूट?
नागपुर :- जिले में रेती घाटों की नीलामी के बाद अवैध रेती उत्खनन का खेल एक बार फिर बेलगाम होता नजर आ रहा है। हाल ही में करोड़ों रुपये की ऊँची बोली लगाकर रेती घाट हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों द्वारा घाटे की भरपाई के लिए नियम-कायदों को ताक पर रखे जाने की चर्चाएँ पूरे जिले में तेज हो गई हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सावनेर तहसील क्षेत्र में बीते कुछ दिनों पहले बिना रॉयल्टी (डब्लू.आर.) के रेती का अवैध परिवहन करते हुए ट्रक पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। पकड़े गए ट्रकों में भरी रेती आखिर किस घाट से लाई गई, किसकी अनुमति से निकाली गई और किसके संरक्षण में ढुलाई की गई यदि इन सवालों की गहन जांच की जाए, तो कई बड़े राज सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, एक वैध रॉयल्टी की आड़ में चार-चार बार बिना रॉयल्टी रेती का परिवहन किए जाने की गंभीर जानकारी सामने आ रही है। इसके साथ ही जिलेभर में ओवरलोड रेती से भरे वाहन दिनदहाड़े सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस और आरटीओ प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम हो गई है कि यह केवल साधारण चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित अवैध तंत्र है, जो प्रशासनिक संरक्षण के बिना चल पाना संभव नहीं माना जा रहा।
कुछ महीने पहले सावली डीपो से रेती गायब होने का मामला आज भी गंभीर सवालों के घेरे में बना हुआ है। आरोप हैं कि इस बड़े प्रकरण को खनन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जानबूझकर दबाने का प्रयास किया गया। बार-बार सवाल उठाने के बावजूद संबंधित माइनिंग ऑफिसर की चुप्पी कई संदेहों को और गहरा कर रही है। जानकारों के अनुसार, इस एक मामले से ही सरकार को करीब 10 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान की आशंका है।
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े आर्थिक नुकसान के बावजूद अब तक इस रेती गायब प्रकरण में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे माइनिंग विभाग की भूमिका पर सवाल और गहराते जा रहे हैं। इतना ही नहीं, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी देने में भी लगातार टालमटोल की जा रही है। इससे यह संकेत और मजबूत होते जा रहे हैं कि इस पूरे मामले में बड़े दबाव तंत्र का इस्तेमाल किया गया है, जिसके चलते अवैध रेती उत्खनन और उससे जुड़ा पूरा खेल बेरोकटोक जारी है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर माइनिंग अधिकारी किसके इशारे पर आंखें मूंदे बैठे हैं? क्या यह सब राजनीतिक दबाव का नतीजा है, या फिर अवैध रेती कारोबार से जुड़े लोगों से उनकी गहरी सांठगांठ है? प्रशासन की खामोशी अब खुद एक बड़ा सवाल बनती जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि रेती घाटों से जुड़े तमाम नियम-कायदों को ताक पर रखकर खुलेआम उत्खनन किया जा रहा है। इस पूरे अवैध कारोबार में कुछ अधिकारियों की सक्रिय भूमिका की चर्चा अब दबे स्वर में नहीं, बल्कि खुलेआम होने लगी है। ग्रामीणों और आम नागरिकों का साफ कहना है कि बिना राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत के इतना बड़ा अवैध खेल संभव ही नहीं है। लोगों का आरोप है कि सब कुछ सबकी जानकारी में होते हुए भी जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं—क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दफन कर दिया जाएगा। नागपुर की जनता अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाब चाहती है।
चौकियाँ धूल फांकती नजर आ रही हैं।
विडंबना यह है कि रेती चोरी रोकने के नाम पर कुछ समय पहले पूरे नागपुर जिले में आनन-फानन में चौकियाँ खड़ी की गई थीं। आज वही चौकियाँ व्यवस्था की निष्क्रियता का प्रतीक बनकर धूल फांकती नजर आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन चौकियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
बिना रॉयल्टी और ओवरलोड रेत परिवहन पर सख्ती का ऐलान, अवैध घाटों पर कार्रवाई कब?
हाल ही में महसूल मंत्री चन्द्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट किया था कि बिना रॉयल्टी (डब्ल्यू.आर.) के रेत परिवहन करने वाले वाहनों पर महसूल और पुलिस विभाग द्वारा चोरी का मामला दर्ज किया जाएगा, जबकि ओवरलोड वाहनों पर आरटीओ द्वारा कड़ी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा। तीनों विभागों को समन्वय के साथ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए जाने का भी दावा किया गया था।
हालांकि, ज़मीनी हकीकत इन दावों के ठीक उलट नजर आ रही है। चेतावनियों के बावजूद आज भी खुलेआम अवैध रेत घाटों से बिना रॉयल्टी और ओवरलोड रेत का उत्खनन व परिवहन जारी है। कार्रवाई अगर कहीं दिखाई देती है तो वह सिर्फ ट्रक चालकों और छोटे वाहन मालिकों तक सीमित नजर आती है, जबकि अवैध रेत के असली स्रोत यानी घाट अब भी बेखौफ चल रहे हैं।
ऐसे में जनता के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि अवैध रेत घाटों को संरक्षण देने वालों पर कब कार्रवाई होगी? क्या रेत माफिया के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए जाएंगे या फिर सख्ती के ये ऐलान केवल कागज़ों और बयानों तक ही सीमित रहेंगे?








