Friday, January 23, 2026
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राज्य में बाघों की मौत का सिलसिला, हाई कोर्ट ने लिया गंभीर संज्ञान

– जनहित याचिका दायर करने के आदेश

नागपुर :- नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही राज्य में बाघों की मौत का सिलसिला सामने आया है। जनवरी माह के पहले 12 दिनों में चार बाघों की मृत्यु होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें लेकर विभित्र समाचार माध्यमों में रिपोर्ट प्रकाशित कई बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दायर करने के आदेश दिए हैं। गुरुवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ ने जनवरी के पहले 12 दिनों में चार बाघों की मौत की खबरों के आधार पर यह आदेश दिया। न्यायालय ने इस मामले में एड. चैतन्य ध्रुव को न्यायालय मित्र नियुक्त करते हुए उन्हें उचित जनहित याचिका दायर करने के निर्देश दिए हैं।बाघों की मौत में महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर : न्यायालय ने टिप्पणी की कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। जहां एक ओर बाघों के हमलों में मानव मृत्यु के मामलों में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर बाघों की मौत की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। वर्ष 2025 में बाघों की मौत के मामलों में महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर रहा था।

13 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को वर्धा जिले के सेलू मुरपाड़ गांव में एक बाधिन की मौत की घटना सामने आई थी। बताया गया कि एक बाघ की खेत में लगाए गए इलेक्ट्रिक फेंसिंग की चपेट में आने से मौत हो गई थी, जिसके बाद उसके शव को पुल के नीचे स्थित पानी के कुंड में फेंक दिया गया। इस घटना को 13 दिन बीत जाने के बावजूद किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसके बाद 7 जनवरी को पेंच व्याघ्र परियोजना के अंतर्गत देवलापार क्षेत्र में आठ से नौ माह उम्र के दो बाघ शावकों की मौत की घटना सामने आई। इन सभी घटनाओं का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका दर्ज कराई है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है।


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