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अपराधियों का बढ़ता ‘हाईटेक’ नेटवर्क

– पुलिस जाँच में तकनीक के इस्तेमाल की कमी उजागर

नागपुर :- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल युग के इस दौर में जहाँ अपराधी अपने तरीकों को ‘हाईटेक’ बना चुके हैं, वहीं पुलिस जांच में तकनीकी संसाधनों का उपयोग उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाया है। इसका सीधा असर अपराध की बढ़ती घटनाओं और उनके समाधान की धीमी गति पर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में बाल अपहरण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले तीन वर्षों में दर्ज दर्जनों मामलों में से 91 अपहृत बच्चे अब तक लापता हैं। यह आंकड़ा न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि अभिभावकों और नागरिकों में गहरी चिंता भी पैदा कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधी अब फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, एआई-आधारित पहचान छिपाने के टूल्स और डार्क वेब जैसे साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनका पता लगाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। वहीं पुलिस विभाग में अभी भी डेटा एनालिटिक्स, फेस रिकग्निशन और ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक प्रणालियों का सीमित उपयोग ही हो रहा है। बाल सुरक्षा से जुड़े संगठनों ने मांग की है कि पुलिस विभाग को स्मार्ट इन्वेस्टिगेशन सिस्टम और साइबर फॉरेंसिक टूल्स से लैस किया जाए, ताकि गुमशुदा बच्चों की तलाश में तेजी लाई जा सके।

स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि अपहरण की घटनाओं ने समाज में भय का माहौल बना दिया है। कई अभिभावक अब बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतराने लगे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में एआई-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और स्मार्ट कैमरा नेटवर्क लागू करने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे ऐसे मामलों के समाधान में तेजी आ सके।

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