Friday, January 23, 2026
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ऐसा दोबारा न हो… हाईकोर्ट

– महाराष्ट्र में कुपोषण से हुई मौतों पर सख्त

मुंबई :- महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण के कारण शिशुओं और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु संबंधी मामलों से निपटने के लिए ‘बहुत कम’ कदम उठाने पर बांबे हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

अपने बाघ अभ्यारण्य के लिए प्रसिद्ध मेलघाट के आदिवासी क्षेत्र में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की बढ़ती मौतों को उजागर करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र घुगे और अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए दृढ़ संकल्प और तत्परता दिखानी चाहिए।

‘सभी मौतें कुपोषण के कारण नहीं होतीं

कोर्ट ने यह जानकर हैरानी जताई कि कुपोषण के कारण 115 से अधिक शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की मृत्यु हो चुकी है। हालांकि, सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि सभी मौतें कुपोषण के कारण नहीं होतीं और इसके पीछे कई अन्य कारण भी होते हैं।

सरकारी वकील पीबी सामंत ने बताया कि इन इलाकों में अधिकतर महिलाओं की शादी 13 या 14 साल की उम्र में ही हो जाती है और वे तुरंत गर्भवती हो जाती हैं। कई बार प्रसव समय से पहले हो जाता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं।

कोर्ट ने सरकार से इस समस्या के मूल कारण का पता लगाने और फिर उससे प्रभावी ढंग से निपटने के उपाय करने का आग्रह किया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, ‘समस्याएं अनेक हैं। सरकार के पास उन समस्याओं को दूर करने की इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प होना चाहिए।

सरकार को कोर्ट का निर्देश

कोर्ट ने आगे कहा कि सरकार को विशेष उपाय करने होंगे और सर्वाधिक जरूरतमंद लोगों को बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं एवं साधन उपलब्ध कराने होंगे।

हाईकोर्ट ने कहा, ‘इस दिशा में बहुत कम कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार को इस मामले में जीरो टालरेंस का रुख अपनाना होगा ताकि पिछले दो-तीन दशकों में देखी जा रही सामान्य कारणों से होने वाली ऐसी मौतें दोबारा न हों।’

27 फरवरी को अगली सुनवाई

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को तय करते हुए सरकार को इस मुद्दे से निपटने की योजना के संबंध में एक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया। इसने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के बीच जागरुकता फैलाने का भी आग्रह किया।

कोर्ट ने सरकार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के लिए कदम उठाने और यह सुनिश्चित करने का सुझाव दिया कि नए स्नातक डाक्टरों के साथ-साथ अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध हों।


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