– 15,००० दो और व्हाट्सएप पर नकल करो!
नागपुर :- राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में परीक्षा विभाग के कामकाज को लेकर तीखी चर्चा हुई. कई महाविद्यालयों में मालप्रैक्टिस के आरोप, एसओपी (मानक कार्यप्रणाली ) के सही तरीके से पालन न होने और जांच रिपोर्टों पर कार्रवाई नहीं होने के मुद्दे पर सदस्यों ने प्रशासन से जवाब मांगा.
बैठक में सदस्य एड. मनमोहन बाजपेयी, विष्णु चांगदे और रतीराम चौधरी ने परीक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां होने की बात कही. उनका कहना था कि इस विषय पर पहले भी चर्चा हो चुकी है, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ. चर्चा के दौरान एक उदाहरण देते हुए बताया गया किएक महाविद्यालय का परीक्षा केंद्र खोजने में अधिकारियों को 8 दिन लग गए.
यहां तक कि परीक्षा नियंत्रक खुद जब वहां पहुंचे तो संबंधित महाविद्यालय ही नहीं मिल सका, जिससे पूरे प्रबंधन पर सवाल खड़े हुए, सदस्यों ने यह भी कहा कि परीक्षा विभाग में पर्याप्त मनुष्यबल नहीं होने के कारण समस्याएं बढ़ रही हैं. कुछ सदस्यों ने इसे नई प्रणाली लागू होने के कारण संक्रमण काल की समस्या भी बताया.
कुछ महाविद्यालयों में माल प्रैक्टिस के भी आरोप भी लगाए गए. बाजपेयी ने एक मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि विद्यार्थियों से प्रति छात्र 15 हजार लेकर वॉट्सएप ग्रुप बनाया गया और परीक्षा से जुड़ी जानकारी साझा की गई.
सभी मुद्दों की जानकारी प्रस्तुत करें : वीसी
जांच शुरू होने के बाद उस ग्रुप और उससे जुड़ी जानकारी हटा दी गई. इस मामले की जांच के लिए समिति बनाई गई है और रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपी जा चुकी है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए. सदस्यों ने यह भी बताया कि एसओपी के अनुसार परीक्षा केंद्र पर प्राचार्य और दो शिक्षकों की समिति होना अनिवार्य है, लेकिन कई महाविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक ही उपलब्ध नहीं है.
ऐसे में इन नियमों का पालन कैसे हो रहा है, इस पर भी सवाल उठाए गए. चर्चा के दौरान कुछ समय के लिए सभा का माहौल तनावपूर्ण हो गया. इस पर उपकुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने परीक्षा प्रक्रिया में खामियों पर नाराजगी जताते हुए परीक्षा नियंत्रक मनीष झोडापे और अधिकारी नवीनकुमार को कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने सभी मुद्दों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए, बैठक में सदस्यों ने विश्वविद्यालय की छवि बनाए रखने के लिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की.




